US-Iran Doha Talks Suspense: दोहा बैठक पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, लेकिन ईरान ने बातचीत से इनकार कर दिया है। जानिए मिडिल ईस्ट के इस नए कूटनीतिक सस्पेंस का सच
US Iran Ceasefire Updates: अमेरिका और ईरान के बीच रिश्ते एक बार फिर चर्चा में हैं। वजह है एक ऐसी संभावित बैठक, जिसके बारे में दोनों देशों के बयान बिल्कुल अलग-अलग हैं। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) कह रहे हैं कि कतर की राजधानी दोहा में बातचीत होने वाली है, तो दूसरी तरफ ईरान साफ कह रहा है कि ऐसी कोई बैठक तय ही नहीं हुई। अब सवाल यह है कि अगर बैठक नहीं हो रही, तो ट्रंप ऐसा दावा क्यों कर रहे हैं? और अगर बातचीत होने वाली है, तो ईरान सार्वजनिक रूप से इससे इनकार क्यों कर रहा है? आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और आखिर कतर में क्या होने वाला है...

दोहा मीटिंग को लेकर ट्रंप का क्या दावा है?
बातचीत का यह सस्पेंस तब शुरू हुआ जब डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर एक पोस्ट लिखी। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने खुद उनसे बात करने की गुजारिश की है और यह बैठक दोहा में होगी। इसके बाद वाशिंगटन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, 'दोहा में कल ही इस मुद्दे पर बैठक होने जा रही है। हम नहीं चाहते कि ईरान के पास कोई भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapon) हो, और वे भी इस बात के लिए राजी हैं।'
ट्रंप के दावे पर ईरान का क्या कहना है?
जैसे ही ट्रंप का यह बयान आया, ईरान ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मीडिया से कहा कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ किसी भी स्तर (Level) पर बातचीत की कोई योजना नहीं है। ईरान का कहना है कि उनकी एक टेक्निकल टीम कतर जरूर जा रही है, लेकिन उसका अमेरिकी अधिकारियों की मौजूदगी से कोई लेना-देना नहीं है।
आखिर कतर में क्या होने वाला है?
भले ही ईरान दुनिया के सामने इस मीटिंग से इनकार कर रहा हो, लेकिन अंदर की कहानी कुछ और ही इशारा कर रही है। समाचार एजेंसी 'रॉयटर्स' के मुताबिक, पर्दे के पीछे कुछ कूटनीतिक हलचल जरूर चल रही है। अमेरिका इस बातचीत के लिए अपने राष्ट्रपति दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर को दोहा भेज रहा है। ईरान के ही एक बड़े अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दोहा में बैठक होने की पूरी उम्मीद है। कहा जा रहा है कि बुधवार को अमेरिका और ईरान की टीमें सीधे आमने-सामने बैठने के बजाय कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों (Mediators) के जरिए अलग-अलग बात कर सकती हैं।
अमेरिका-ईरान सीजफायर के बीच क्यों मची है ये अफरातफरी?
यह पूरा विवाद ऐसे समय पर खड़ा हुआ है, जब दोनों देशों के बीच पिछले चार महीने से चल रहा युद्ध एक अस्थाई समझौते (Ceasefire) के तहत रुका हुआ है, लेकिन इस सीजफायर को बेहद कमजोर माना जा रहा है। अभी पिछले वीकेंड ही दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन चले हैं। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि ईरान ने समुद्र में उसके दो व्यापारिक जहाजों पर हमला किया, जिसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के ठिकानों को निशाना बनाया। दूसरी तरफ, ईरान ने भी कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन दागे हैं।
ईरान-अमेरिका की इस बातचीत का दुनिया पर क्या असर होगा?
अगर यह बातचीत नहीं होती है या फेल हो जाती है, तो इसका असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। दोहा की इस बातचीत में 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) की सुरक्षा पर चर्चा होनी है, जहां से दुनिया का सबसे ज्यादा तेल सप्लाई होता है। यहां तनाव बढ़ने से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। इस बैठक का सीधा कनेक्शन लेबनान और इजरायल के बीच चल रहे तनाव को शांत करने से भी जुड़ा है।


