जॉर्डन में ईरानी मिसाइल गिरने से दो अमेरिकी सैनिकों की मौत, एक लापता! पांच देशों पर ईरान के भीषण पलटवार से दहला मिडिल ईस्ट। सुप्रीम लीडर खामेनेई के 'खौफनाक सबक' वाले बयान ने दुनिया में मचाया हड़कंप!

Jordan US Soldiers Killed: मिडल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) और पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि जॉर्डन में हुए एक भीषण ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमले में दो अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं, जबकि एक सैनिक अभी भी लापता है। पेंटागन के अनुसार, यह हमला 17 जुलाई को हुआ जब अमेरिकी और सहयोगी सेनाएं ईरान की ओर से दागी गईं मिसाइलों को रोकने की कोशिश कर रही थीं। हमले के बाद मचे हड़कंप के बीच CENTCOM ने कहा है कि शहीदों के परिवारों को सूचित किए जाने के 24 घंटे बाद ही उनकी पहचान उजागर की जाएगी। इस ताजा हमले ने क्षेत्र में पहले से ही सुलग रही बारूद की ढेर में चिंगारी का काम किया है।

बढ़ता मौत का आंकड़ा और छावनी में पसरा सन्नाटा

पेंटागन और CENTCOM ने पुष्टि की है कि इस युद्ध की शुरुआत के बाद से अब तक मारे गए अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या बढ़कर 16 हो गई है, जबकि 430 से अधिक सैनिक घायल हो चुके हैं। हमले के तुरंत बाद, चार गंभीर रूप से घायल अमेरिकी सैनिकों को जॉर्डन के स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। गनीमत यह रही कि प्राथमिक उपचार के बाद चारों सैनिकों को छुट्टी दे दी गई है, और मामूली चोटों का शिकार हुए अन्य सैनिक वापस अपनी ड्यूटी पर लौट आए हैं। हालांकि, मारे गए सैनिकों के शिविरों में इस समय गहरा सन्नाटा और शोक का माहौल है। CENTCOM ने स्पष्ट किया है कि वह मारे गए जांबाजों की पहचान और अन्य विवरण तब तक गुप्त रखेगा, जब तक कि उनके परिवारों को सूचित किए हुए पूरे 24 घंटे न बीत जाएं।

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खामेनेई की 'रहस्यमयी' चेतावनी: "कभी न भूलने वाले सबक के लिए तैयार रहे अमेरिका"

इस सैन्य टकराव के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक गलियारों में तब खलबली मच गई, जब ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक बेहद आक्रामक और रहस्यमयी पोस्ट साझा की। युद्ध शुरू होने के बाद से जनता के सामने न आने वाले खामेनेई ने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वाशिंगटन ने ईरान पर अपने हमले बंद नहीं किए, तो उसे "कभी न भूलने वाले सबक" सिखाए जाएंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरानी राष्ट्र और उनका 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' (प्रतिरोध का धड़ा) "अमेरिकी दुश्मन" को कड़ा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके साथ ही, खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर वाले एक पूर्व समझौते को "बेकार और अमान्य" करार देकर कूटनीति के सारे दरवाजे बंद करने के संकेत दे दिए हैं।

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लगातार सातवीं रात बरसी आफत: अमेरिका का चौतरफा एक्शन

इस खूनी खेल की पटकथा शनिवार तड़के ही लिख दी गई थी, जब अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर घुसकर बड़े पैमाने पर सर्जिकल स्ट्राइक की। यह लगातार सातवीं रात थी जब अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरान के सैन्य तंत्र को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना के दावों के मुताबिक, उन्होंने ईरान के भीतर निगरानी स्थलों, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर, जमीन के नीचे बने गुप्त हथियारों के गोदामों और उनकी समुद्री क्षमताओं को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया था। अमेरिका का मकसद ईरान की रीढ़ तोड़ना था, लेकिन इसके जवाब में जो हुआ, उसने पेंटागन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

बदले की आग में सुलग उठा मध्य पूर्व: पांच देशों पर एक साथ हमला

अमेरिका के इस चौतरफा हमले से बौखलाए तेहरान ने बेहद आक्रामक जवाबी रणनीति अपनाई। ईरान ने केवल जॉर्डन ही नहीं, बल्कि कुवैत, इराक, बहरीन और सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को एक साथ निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं। शनिवार को हुए इन हमलों में सबसे भीषण तबाही कुवैत में देखने को मिली। ईरानी ड्रोनों ने कुवैत में एक प्रमुख वॉटर डिसेलिनेशन प्लांट (पानी से नमक अलग करने वाला संयंत्र) और एक बड़े तेल सुविधा केंद्र को निशाना बनाया, जिससे वहां की बुनियादी व्यवस्था चरमरा गई है।

इन ताजा घटनाक्रमों और दोनों ओर से जारी आक्रामक बयानों ने मध्य पूर्व में किसी भी कूटनीतिक या शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीदों को फिलहाल नेस्तनाबूद कर दिया है। दुनिया अब इस आशंका से कांप रही है कि कहीं यह टकराव एक पूर्ण वैश्विक युद्ध का रूप न ले ले।