UP बजट 2026-27 में ऊर्जा क्षेत्र के लिए 65,926 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में 19 घंटे तक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। पारेषण क्षमता 82% बढ़ाकर 32,500 मेगावॉट कर दी गई है। कृषि फीडर और उपकेंद्रों का भी विस्तार हुआ है।
लखनऊ। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए कहा कि योगी सरकार उत्तर प्रदेश को ऊर्जा उत्पादन, बेहतर बिजली आपूर्ति और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। बजट में ऊर्जा विभाग की विभिन्न योजनाओं के लिए 65,926 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि वर्ष 2025-26 की तुलना में लगभग 8 प्रतिशत अधिक है, जो राज्य की ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सुधार: 19 से 24 घंटे तक आपूर्ति सुनिश्चित
सरकार के अनुसार दिसंबर 2025 तक औसत विद्युत आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में 19 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
- तहसील मुख्यालयों पर 21 घंटे 49 मिनट बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
- जनपद मुख्यालयों पर 24 घंटे बिजली दी जा रही है।
ये आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
1 अप्रैल 2022 से दिसंबर 2025 के बीच 2,41,088 निजी नलकूप संयोजन जारी किए गए। वहीं सामान्य योजना के तहत वर्ष 2017-18 से अब तक 1,66,135 नलकूप संयोजन दिए जा चुके हैं। कृषि कार्यों के लिए अलग फीडर निर्माण योजना के अंतर्गत 4,680 के लक्ष्य के मुकाबले 4,048 कृषि फीडरों का निर्माण किया गया है। इन फीडरों पर किसानों को 10 घंटे विद्युत आपूर्ति दी जा रही है, जिसे देश में सर्वाधिक बताया गया है।
उपकेंद्र और ट्रांसफॉर्मर विस्तार: पारेषण क्षमता में 82% वृद्धि
ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर कार्य किए गए हैं। 1 अप्रैल 2022 से वर्ष 2025-26 तक:
- 2,410 नए 33/11 केवी उपकेंद्रों का निर्माण एवं क्षमता वृद्धि
- 20,924 नए वितरण ट्रांसफॉर्मरों की स्थापना
- 85,684 ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता वृद्धि
इसके साथ ही राज्य की पारेषण क्षमता वर्ष 2016-17 के 17,890 मेगावॉट से बढ़ाकर वर्ष 2025-26 में 32,500 मेगावॉट कर दी गई है। यह 82 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है और ऊर्जा क्षेत्र में राज्य की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।


