वेनेजुएला में आए 7.5 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई। इमारतें ढहीं, सड़कें मलबे से भर गईं और लोग जान बचाने के लिए भागते नजर आए। राहत-बचाव कार्य जारी है।

काराकास: 24 जून 2026 की शाम वेनेजुएला के इतिहास में एक काले पन्ने की तरह दर्ज हो गई है। जब लोग अपने रोज़मर्रा के कामों को निपटाकर घरों की ओर लौट रहे थे, तभी अचानक धरती के भीतर मची भीषण हलचल ने हंसते-खेलते शहरों को पल भर में मलबे के ढेर में तब्दील करना शुरू कर दिया। वेनेजुएला के उत्तरी-मध्य हिस्से में आए दो बैक-टू-बैक विनाशकारी भूकंपों ने पूरे देश को इस कदर झकझोर दिया है कि राजधानी काराकास समेत कई बड़े शहर अब खंडहर जैसे नज़र आ रहे हैं। शुरुआती अनुमानों और भयावह परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि इस महा-आपदा में कमोबेश 10,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। पूरे देश में इस वक्त चीख-पुकार और दहशत का माहौल है।

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39 सेकंड का वो खौफनाक काल: जब एक के बाद एक आए दो महा-भूकंप

भूविज्ञान के इतिहास में इस घटना को बेहद दुर्लभ और घातक माना जा रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह महज कोई सामान्य झटका नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी प्राकृतिक तबाही थी:

  • पहला घातक प्रहार: शाम के वक्त अचानक रिक्टर स्केल पर 7.1 तीव्रता का पहला शक्तिशाली झटका महसूस किया गया, जिसने इमारतों की नींव हिला दी।
  • 39 सेकंड का सस्पेंस: लोग अभी पहले झटके से संभलकर खुले आसमान की तरफ भाग ही रहे थे कि ठीक 39 सेकंड बाद इससे भी कहीं अधिक प्रचंड 7.5 तीव्रता का दूसरा मुख्य भूकंप आया।
  • तबाही का केंद्र: इस महा-विनाश का केंद्र युमारे के पास ज़मीन के नीचे बताया जा रहा है। इन दोहरे झटकों के संयुक्त प्रहार ने बहुमंजिला इमारतों के कंक्रीट के ढांचे को तिनके की तरह बिखेर दिया।

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सोशल मीडिया पर वायरल 5 वीडियो: जब कैमरे में कैद हुआ साक्षात 'काल'

इस त्रासदी की भयावहता की गवाही सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहे वो 5 वीडियो दे रहे हैं, जिन्हें देखकर किसी का भी दिल दहल जाए। इंटरनेट पर सामने आई इन तस्वीरों और फुटेज ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है:

  • धूल का विशाल गुबार: पहले वीडियो में एक विशाल बहुमंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह भरभराकर ढहती नजर आ रही है। पल भर में पूरे इलाके में धूल का ऐसा काला गुबार छा जाता है कि दिन में ही अंधेरा महसूस होने लगता है। लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर चीखते-चिल्लाते भाग रहे हैं।
  • मलबे में तब्दील हुईं सड़कें: दूसरे वीडियो में शहर की मुख्य सड़कें अब सड़कों जैसी नहीं दिख रहीं। कंक्रीट के बड़े-बड़े बोल्डर, मुड़ी हुई लोहे की छड़ें और ढहे हुए मकानों का मलबा पूरी सड़कों पर फैला हुआ है।

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  • अपनों को बचाने की जंग: एक बेहद भावुक करने वाले वीडियो में लोग अपनी जान की परवाह न करते हुए अपने मासूम बच्चों और वफादार पालतू जानवरों को अपनी गोद में उठाकर सुरक्षित स्थानों की ओर नंगे पैर भागते दिखाई दे रहे हैं।
  • घायलों की कतारें: चौथे वीडियो में काराकास की सड़कों पर मची अफरा-तफरी साफ देखी जा सकती है। धूल और धुएं के बीच स्थानीय लोग और पुलिसकर्मी खून से लथपथ घायलों को मलबे से बाहर खींचकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचा रहे हैं।
  • जमींदोज इमारतें: प्रसिद्ध पत्रकार @AlbertoRodNews द्वारा साझा किए गए पांचवें फुटेज में राहत और बचावकर्मी पूरी तरह जमींदोज हो चुकी इमारतों के मलबे के ऊपर सर्च ऑपरेशन चलाते नजर आ रहे हैं।

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समंदर पार तक गूंजा कंपन: कई शहर ब्लैकआउट, एयरपोर्ट्स हुए ठप

इस भूकंप का असर सिर्फ वेनेजुएला तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके विनाशकारी झटके पड़ोसी देश कोलंबिया की राजधानी बोगोटा तक महसूस किए गए, जिससे वहां भी लोग डर के मारे घरों से बाहर निकल आए। वेनेजुएला के ला ग्वायरा, वालेंसिया और अन्य प्रमुख शहरों में स्थित आलीशान होटलों, रिहायशी परिसरों और सरकारी कार्यालयों को भारी नुकसान पहुंचा है। तबाही के तुरंत बाद कई राज्यों में बिजली के ग्रिड फेल हो गए हैं और इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप हो चुकी हैं, जिससे प्रभावित इलाकों से संपर्क करना लगभग नामुमकिन हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मैक्वेटिया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (Maiquetía International Airport) पर सभी उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है और रनवे की जांच की जा रही है।

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मलबे के नीचे दबी जिंदगी: देश में इमरजेंसी लागू, मौत का आंकड़ा बढ़ने का डर

स्थानीय प्रशासन और सरकार ने देश में तत्काल प्रभाव से 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) की घोषणा कर दी है। गृह मंत्रालय और राहत एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी और डरावनी चिंता इस वक्त उन हज़ारों लोगों को लेकर है, जो इस समय ढह चुकी इमारतों के भारी मलबे के नीचे दबे हुए हैं और जिंदगी तथा मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं।

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प्रशासन ने जीवित बचे लोगों से सख्त अपील की है कि वे किसी भी सूरत में अभी अपने क्षतिग्रस्त घरों या इमारतों के अंदर न जाएं और खुले मैदानों में ही शरण लें, क्योंकि मुख्य भूकंप के बाद लगातार आ रहे 'आफ्टरशॉक्स' (Aftershocks) कमज़ोर हो चुके ढांचों को कभी भी गिरा सकते हैं। राहत एवं बचाव दल क्रेन और आधुनिक उपकरणों के सहारे मलबे को हटाने में जुटे हैं, लेकिन मलबे के फैलाव को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे समय बीतेगा, मृतकों और घायलों का आधिकारिक आंकड़ा और भी खौफनाक रूप अख्तियार कर सकता है।