2034 तक पूरी संपत्ति दान करने का वॉरेन बफे का ऐलान दुनिया को चौंका गया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर गेट्स फाउंडेशन से 20 साल पुराना रिश्ता अचानक क्यों खत्म हो गया?
Warren Buffett Donation: निवेश की दुनिया के बेताज बादशाह और 'ओमाहा के जादूगर' कहे जाने वाले वॉरेन बफे ने एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला लिया है, जिसने पूरी दुनिया के कॉर्पोरेट और चैरिटी जगत में खलबली मचा दी है। अगले महीने अपना 96वां जन्मदिन मनाने जा रहे बफे अब अपनी बेहिसाब दौलत को हमेशा के लिए विदा करने की तैयारी में हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि साल 2034 तक वह बर्कशायर हैथवे में अपनी पूरी संपत्ति का दान कर देंगे। इस महा-संकल्प के साथ ही बफे ने अपने चैरिटेबल दान की रफ्तार को दोगुने से भी अधिक बढ़ा दिया है। लेकिन इस दानवीरता की कहानी के पीछे सिर्फ उदारता नहीं, बल्कि कुछ ऐसे कड़े फैसले भी छिपे हैं जिन्होंने सालों पुरानी दोस्ती और साझेदारियों को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया है।
आठ साल का 'डेडलाइन' और $140 बिलियन का दांव
"मेरा लक्ष्य लगभग आठ साल के अंदर अपने सभी बर्कशायर शेयर दान कर देना है।"- वॉरेन बफे
मौजूदा समय में वॉरेन बफे के पास बर्कशायर हैथवे के ऐसे शेयर हैं, जिनकी बाजार कीमत $140 बिलियन (लगभग 11.6 लाख करोड़ रुपये) से भी अधिक है। बफे ने साफ कर दिया है कि उनकी मौत कभी भी हो, लेकिन 31 दिसंबर, 2034 तक उनके सारे बचे हुए शेयर उनके तय किए गए चार पारिवारिक फाउंडेशन्स के सुपुर्द कर दिए जाएंगे। इस नए लक्ष्य का सीधा मतलब यह है कि बफे अब हर साल कम से कम $17 बिलियन के शेयर दान करेंगे। यह आंकड़ा पिछले साल दान किए गए $7 बिलियन के स्टॉक से दोगुने से भी ज्यादा है। इतनी बड़ी रकम का सालाना ट्रांसफर वैश्विक बाजार और दान की दुनिया में एक नया रिकॉर्ड स्थापित करने जा रहा है।
गेट्स फाउंडेशन को 'नो मोर मनी': टूट गया दशकों पुराना वादा!
इस बड़ी घोषणा का सबसे चौंकाने वाला और सस्पेंस से भरा पहलू यह है कि बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स द्वारा स्थापित 'गेट्स फाउंडेशन' को इस महा-दान में से अब एक भी फूटी कौड़ी नहीं मिलेगी। इसके साथ ही बफे के उस ऐतिहासिक 'लाइफटाइम प्रॉमिस' का अंत हो गया है, जो उन्होंने साल 2006 में बड़ी उम्मीदों के साथ किया था। पहले के तय शेड्यूल के मुताबिक, बफे को इसी महीने गेट्स फाउंडेशन को करीब $4.5 बिलियन दान करने थे। लेकिन अब यह सारा पैसा रोक दिया गया है। पिछले दो दशकों में बफे ने गेट्स फाउंडेशन को कुल मिलाकर $47 बिलियन से ज्यादा की मदद दी है, जिसकी आज की तारीख में बाजार वैल्यू $159 बिलियन से अधिक है। लेकिन अब इस सुनहरे सफर पर हमेशा के लिए विराम लग चुका है।

दोस्ती में दरार और जेफ्री एप्स्टीन का वो 'काला साया'
आखिर ऐसा क्या हुआ कि बिल गेट्स जैसे करीबी दोस्त से वॉरेन बफे ने पूरी तरह मुंह मोड़ लिया? दरअसल, इस गहरी दोस्ती में पहली दरार 2021 में तब दिखी थी, जब बिल और मेलिंडा ने अपनी 27 साल पुरानी शादी को खत्म करने का फैसला किया। उसके ठीक दो महीने बाद बफे ने गेट्स फाउंडेशन के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया था। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई। साल 2024 में तब बड़ा धमाका हुआ जब जेफ्री एप्स्टीन (कुख्यात बाल-यौन अपराधी) की फाइलों में बिल गेट्स के साथ उनके गहरे संबंधों के खुलासे हुए। इस विवाद ने बफे को अंदर तक हिलाकर रख दिया। बफे ने एक इंटरव्यू में बेहद कड़े शब्दों में कहा था: "जब से यह पूरा मामला सामने आया है, तब से मैंने बिल गेट्स से बिल्कुल भी बात नहीं की है।"
बच्चों के हाथ में कमान: कहां जाएगा बफे का अथाह पैसा?
बिल गेट्स को किनारे लगाने के बाद, वॉरेन बफे ने अपनी वसीयत में बड़े बदलाव किए हैं। उनकी मौत के बाद उनकी संपत्ति का "99% से ज़्यादा" हिस्सा एक नए चैरिटेबल ट्रस्ट में जाएगा, जिसके ट्रस्टी उनके अपने तीन बच्चे होंगे। फिलहाल, रफ्तार बढ़ाते हुए बफे ने अपनी दिवंगत पहली पत्नी के नाम पर बने 'सुसान थॉम्पसन बफेट फाउंडेशन' को लगभग $4.5 बिलियन के शेयर दिए हैं। इसके अलावा, उनके बच्चों द्वारा संचालित तीन अन्य फाउंडेशन्स-'शेरवुड फाउंडेशन', 'हावर्ड जी. बफेट फाउंडेशन' और 'नोवो फाउंडेशन'-में से प्रत्येक को करीब $500 मिलियन के शेयर सौंपे गए हैं। दुनिया बड़ी उत्सुकता से देख रही है कि आने वाले आठ सालों में बफे के बच्चे इस महा-साम्राज्य की दौलत को किस तरह दुनिया की भलाई में इस्तेमाल करते हैं।


