प. बंगाल के हावड़ा स्टेशन के बाहर बुलडोजर ने बड़ी कार्रवाई की है। यहां गंगा घाट और बस स्टैंड के पास की अवैध दुकानों और कब्जों को हटा दिया गया। भारी पुलिस फोर्स और RPF समेत रेलवे अधिकारियों की निगरानी में यह अभियान चलाया गया। इस तोड़फोड़ के वीडियो ऑनलाइन वायरल हो गए हैं, जिस पर लोग मिली-जुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्टेशन के पास अतिक्रमण हटाने के लिए एक बड़ी कार्रवाई हुई है। यहां बुलडोजर से अवैध दुकानों और सड़क किनारे बने ढांचों को तोड़ा गया। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं, जिसके बाद ऑनलाइन बहस छिड़ गई है। यह कार्रवाई हावड़ा स्टेशन के बाहर गंगा घाट और बस स्टैंड के पास वाले इलाकों में हुई। अधिकारियों ने उन दुकानों और कारोबारों को हटाया, जिन्होंने कथित तौर पर सालों से फुटपाथ और सार्वजनिक रास्तों पर कब्जा कर रखा था। इस ऑपरेशन के दौरान भारी पुलिस बल तैनात था और कड़ी सुरक्षा के बीच तोड़फोड़ की गई।

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ये वीडियो ऑनलाइन तेजी से फैल गए। कई लोगों ने इस कदम की तारीफ की और कहा कि देश के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक के आसपास के इलाके को साफ करने और सुधारने के लिए यह जरूरी था। वहीं, कुछ यूजर्स ने इस कार्रवाई से जुड़े राजनीतिक दावों पर सवाल उठाया और बताया कि यह जमीन रेलवे की है।

रेलवे की जमीन से हटाए गए अवैध कब्जे

अधिकारियों के मुताबिक, जिस पूरे इलाके में तोड़फोड़ हुई, वह रेलवे की संपत्ति के तहत आता है। इसी वजह से यह ऑपरेशन रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की देखरेख में किया गया।

इस कार्रवाई के दौरान IOW विभाग, RPF और हावड़ा सिटी पुलिस की टीमें बड़ी संख्या में मौजूद थीं। बुलडोजर का इस्तेमाल कर अवैध निर्माणों, सड़क किनारे लगी ठेलों और कब्जा की गई सार्वजनिक जमीन पर चल रहे कारोबारों को हटाया गया।

अधिकारियों ने कहा कि यह अभियान स्टेशन इलाके और सार्वजनिक रास्तों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए चलाया गया था।

अधिकारियों ने किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए ऑपरेशन के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था भी की थी। पुलिसकर्मी पूरे इलाके में तैनात रहे, जबकि प्रशासन ने स्थिति पर करीब से नजर रखी।

प्रशासन ने यह भी कहा कि सार्वजनिक सड़कों और रेलवे परिसरों को अवैध कब्जे से मुक्त रखने के लिए भविष्य में भी इसी तरह के अभियान जारी रह सकते हैं।

ऑनलाइन राजनीतिक दावे और बहस

यह तोड़फोड़ अभियान ऑनलाइन राजनीतिक चर्चा का भी हिस्सा बन गया। कई पोस्ट में दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल में नेतृत्व बदलने के बाद अब सख्त कार्रवाई शुरू हो गई है।

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इस बुलडोजर एक्शन को सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व से जोड़ा और कहा कि अब राज्य में बदलाव दिख रहा है।

हालांकि, यूजर्स के एक दूसरे वर्ग ने बताया कि यह ऑपरेशन मुख्य रूप से रेलवे की जमीन से जुड़ा था और इसमें रेलवे के अधिकारी शामिल थे।

एक यूजर ने कमेंट किया, “यह सफाई भारतीय रेलवे कर रहा है, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री नहीं। कम से कम सही जानकारी तो पोस्ट करें।”

इस बहस के बावजूद, वीडियो को सभी प्लेटफॉर्म पर लगातार अटेंशन मिलता रहा।

सोशल मीडिया पर लोगों ने दी तीखी प्रतिक्रिया

वायरल क्लिप पर हजारों रिएक्शन आए, जिसमें कई यूजर्स ने अतिक्रमण विरोधी अभियान का स्वागत किया।

एक यूजर ने लिखा, “उम्मीद है, हम अगले 5 सालों में कोलकाता को सच में एक मॉडर्न मेट्रोपॉलिटन शहर कह पाएंगे।”

एक अन्य ने कहा, “सही है, अब थोड़ा साफ दिखेगा कम से कम।”

“बहुत जरूरी था”, “साफ करो” और “जरूरी था ये” जैसे कमेंट्स भी खूब शेयर किए गए।

कुछ यूजर्स ने तो कोलकाता के दूसरे भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी ऐसी ही कार्रवाई की मांग कर दी।

एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “अगला बुलडोजर धरमतल्ला में प्लीज।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “पूरा कचरा बना के रखे थे कोलकाता को।”

कई लोगों ने इस कार्रवाई को इस बात का संकेत बताया कि “बंगाल अब ठीक हो रहा है”।

वहीं, कुछ यूजर्स ने गरीब दुकानदारों और छोटे वेंडरों के लिए चिंता जताई, जिनका कारोबार प्रभावित हुआ।

एक कमेंट था, “जो होगा सिर्फ गरीब के साथ…,” जिसका मतलब था कि ऐसे अभियानों का असर ज्यादातर गरीब लोगों पर ही पड़ता है।

फोकस सार्वजनिक जगहों और स्टेशन तक पहुंच पर

हावड़ा स्टेशन भारत के सबसे व्यस्त रेलवे हब में से एक है और यहां दिन भर यात्रियों, बसों, टैक्सियों और स्थानीय कारोबारों की भीड़ रहती है।

अधिकारियों का मानना है कि फुटपाथ और सार्वजनिक क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने से स्टेशन के आसपास आवाजाही में सुधार होगा और भीड़भाड़ कम होगी।

यह कार्रवाई अब ऑनलाइन एक बड़ा चर्चा का विषय बन गई है। समर्थक इसे एक जरूरी सफाई अभियान बता रहे हैं, जबकि आलोचक रोजी-रोटी पर पड़ने वाले असर और इस ऑपरेशन के आसपास के राजनीतिक संदेशों पर सवाल उठा रहे हैं।

जैसे-जैसे चर्चाएं जारी हैं, अधिकारियों ने संकेत दिया है कि रेलवे की जमीन और सार्वजनिक रास्तों को अवैध कब्जे से मुक्त रखने के लिए आने वाले दिनों में भी अतिक्रमण विरोधी अभियान जारी रह सकते हैं।