Western Railway Upgrade: वेस्टर्न रेलवे कई रूटों पर ट्रेनों की रफ्तार 130 किमी/घंटा तक बढ़ाने की तैयारी में है। मुंबई-दिल्ली कॉरिडोर को 160 किमी/घंटा के लिए अपग्रेड किया जा रहा है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें, नए प्लेटफॉर्म और यात्री सुविधाओं पर भी बड़ा फोकस है।

वेस्टर्न रेलवे की ओर से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने और नेटवर्क को आधुनिक बनाने की दिशा में शुरू की गई बड़ी योजना आने वाले वर्षों में यात्रियों के सफर का अनुभव बदल सकती है। मुंबई-दिल्ली जैसे देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों पर यात्रा समय घटाने की तैयारी के साथ रेलवे अब इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड पर तेज़ी से काम कर रहा है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि बढ़ती मांग और बेहतर कनेक्टिविटी की जरूरत को देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

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चर्चगेट स्थित वेस्टर्न रेलवे मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान महाप्रबंधक रामाश्रय पांडे ने बताया कि कई रूटों पर ट्रेनों की अधिकतम गति 100-110 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़ाकर 130 किलोमीटर प्रति घंटा करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए ट्रैक, सिग्नलिंग सिस्टम और अन्य तकनीकी ढांचे को अपग्रेड किया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यात्रियों का समय बचाना और रेल संचालन को अधिक प्रभावी बनाना है।

मुंबई-दिल्ली रूट पर 160 किमी प्रति घंटा की तैयारी

रेलवे का सबसे बड़ा फोकस मुंबई-दिल्ली मुख्य रेल कॉरिडोर पर है। इस रूट पर ट्रेनों की गति को 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचाने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। यदि यह परियोजना तय समय पर पूरी होती है तो दोनों महानगरों के बीच यात्रा अवधि में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से मिलेगा बड़ा फायदा

वेस्टर्न रेलवे का मानना है कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) पूरी तरह सक्रिय होने के बाद मुख्य नेटवर्क पर मालगाड़ियों का दबाव कम होगा। इससे यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त ट्रैक क्षमता उपलब्ध होगी और अधिक ट्रेनों का संचालन संभव हो सकेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव रेलवे नेटवर्क की दक्षता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की मांग

लंबी दूरी की यात्रा को और बेहतर बनाने के लिए वेस्टर्न रेलवे ने 3 से 4 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की मांग भी की है। इन ट्रेनों के शुरू होने से यात्रियों को तेज गति के साथ आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिलेगा। रेलवे को उम्मीद है कि भविष्य में इन ट्रेनों की संख्या और बढ़ सकती है।

बांद्रा और मुंबई सेंट्रल में होगा विस्तार

यात्री सुविधाओं को मजबूत करने के लिए बांद्रा टर्मिनस और मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर भी बड़े बदलाव की योजना है। बांद्रा टर्मिनस में 10 नई स्टेबलिंग लाइनें विकसित की जाएंगी, जिससे अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन संभव होगा। वहीं मुंबई सेंट्रल के प्लेटफॉर्म विस्तार के बाद 24 कोच वाली लंबी ट्रेनों का संचालन किया जा सकेगा।

यात्रियों की संख्या में आई गिरावट

हालांकि, रेलवे के सामने एक नई चुनौती भी उभर रही है। पिछले दो महीनों में वेस्टर्न रेलवे के यात्री यातायात में 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। अधिकारियों का मानना है कि मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के कारण कुछ यात्रियों ने रेल सेवाओं की बजाय मेट्रो को प्राथमिकता देना शुरू किया है। इसके बावजूद रेलवे को भरोसा है कि तेज रफ्तार ट्रेनों, आधुनिक स्टेशनों और बेहतर सुविधाओं के जरिए आने वाले समय में यात्रियों की संख्या फिर बढ़ेगी और देश का रेल नेटवर्क अधिक सक्षम और प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।