क्या टीएमसी में बगावत से ममता बनर्जी की राजनीतिक पकड़ कमजोर हो रही है? TMC के 20 सांसदों के NDA समर्थन का बंगाल की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? क्या ममता बनर्जी अपनी पार्टी में बढ़ती नाराजगी को रोक पाएंगी? क्या टीएमसी में टूट से 2029 लोकसभा चुनाव पर असर पड़ेगा?

Rebel TMC MPs To Support NDA: तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को पत्र लिखकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करने की इच्छा जताई है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बताया कि उनके सहित 20 सांसदों ने एनडीए का समर्थन करने का फैसला किया है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।

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कौन हैं TMC के बागी सांसद?

जहां एक तरफ तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और अन्य वरिष्ठ नेता विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' की बैठक में शामिल हुए, वहीं दूसरी ओर पार्टी के 20 लोकसभा सांसदों ने नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के साथ बैठक की। यह बैठक 9 मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित आवास पर हुई। बैठक में शामिल सांसदों में काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदर, अरूप चक्रवर्ती, जून मलीह, दीपक अधिकारी, कालीपदा सोरेन, जगदीप बसुनिया, आसित मल, अबू ताहेर, खलीलुर रहमान, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, शत्रुघ्न सिन्हा, प्रतिमा मोंडल और पार्थो भौमिक समेत कई अन्य सांसद शामिल थे। बताया जा रहा है कि इन सांसदों ने लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था किए जाने की मांग भी स्पीकर से की है।

काकोली घोष दस्तीदार ने क्या कहा?

काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि वे पश्चिम बंगाल के जनादेश को स्वीकार करती हैं और उनका मानना है कि उनका राजनीतिक भविष्य एनडीए के साथ अधिक सुरक्षित रहेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राज्य में बदलते राजनीतिक हालात को देखते हुए कई सांसद नई राजनीतिक दिशा चुनना चाहते हैं।

पहले भी हुई थी सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात

टीएमसी में संभावित टूट की चर्चाओं के बीच इससे पहले भी सुखेंदु रॉय और काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में पार्टी के 16 सांसदों ने सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। उस समय भी राजनीतिक गलियारों में अटकलें लगाई जा रही थीं कि पार्टी के कुछ सांसद नेतृत्व से नाराज हैं और नए राजनीतिक विकल्प तलाश रहे हैं।

दल-बदल कानून के तहत क्या है नियम?

यदि तृणमूल कांग्रेस के दो-तिहाई सांसद एक साथ पार्टी छोड़ते हैं, तो उन पर दल-बदल विरोधी कानून लागू नहीं होगा। संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, लोकसभा में टीएमसी के कम से कम 19 सांसदों को पार्टी छोड़नी होगी, तभी इसे वैध विभाजन माना जाएगा। ऐसे में सांसदों की सदस्यता पर तत्काल खतरा नहीं रहेगा।

सुखेंदु रॉय ने ममता सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

इससे पहले टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु रॉय ने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देते समय उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि राज्य सरकार की कार्यशैली से वे असंतुष्ट हैं और इसी कारण उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया।