8,047 मीटर ऊंचे ब्रॉड पीक पर बर्फीले तूफान के बाद 'निम्सदाई' निर्मल पुर्जा लापता हैं। ट्रैकिंग डिवाइस से हलचल के संकेत मिले हैं, लेकिन क्या वे सुरक्षित हैं? खोज अभियान जारी है।
नई दिल्ली: पर्वतारोहण की दुनिया से एक ऐसी दिल दहला देने वाली और रहस्यमयी खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया के एडवेंचर प्रेमियों की सांसें थाम दी हैं। दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों को अपने कदमों से नापने वाले नेपाल में जन्मे दिग्गज पर्वतारोही और पूर्व रॉयल मरीन निर्मल पुर्जा, जिन्हें दुनिया 'निम्सदाई' के नाम से जानती है, पाकिस्तान के पहाड़ों में लापता हो गए हैं। पाकिस्तान में स्थित 8,047 मीटर ऊंचे ब्रॉड पीक पर आए एक विनाशकारी बर्फीले तूफ़ान (एवलांच) ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें निम्सदाई समेत लगभग दस पर्वतारोही लापता हैं। इस हादसे में दो पर्वतारोहियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिससे यह रेस्क्यू ऑपरेशन एक बेहद तनावपूर्ण और सस्पेंसिव मोड़ पर पहुंच गया है।
ब्रॉड पीक पर आखिर क्या हुआ? जब अचानक टूट पड़ा मौत का तूफ़ान
- यह हादसा गुरुवार को हुआ जब पर्वतारोहियों का एक दल ब्रॉड पीक को फतह करने के मिशन पर था। तभी अचानक एक भीषण हिमस्खलन हुआ और पूरा का पूरा अभियान दल उस बर्फीले बवंडर की चपेट में आ गया।
- 'सेवन समिट ट्रेक्स' के जनरल मैनेजर थानेश्वर गुरागाईं के मुताबिक, घटना के तुरंत बाद पूरे दल से संपर्क टूट गया। खराब मौसम और लगातार गिरते तापमान के कारण राहत और बचाव दल के हेलीकॉप्टर तुरंत उड़ान नहीं भर सके, जिससे सस्पेंस और डर का माहौल और गहरा हो गया।
- रेस्क्यू टीमों को ज़मीन के रास्ते ही खोज अभियान शुरू करना पड़ा। शुरुआती ज़मीनी खोज के दौरान कुछ खुशकिस्मत पर्वतारोहियों को सुरक्षित बेस कैंप वापस लाया गया, लेकिन दो शवों की बरामदगी ने इस दल के बाकी सदस्यों के जिंदा होने की उम्मीदों पर गहरा आघात किया है।
- अल्पाइन क्लब ऑफ़ पाकिस्तान ने ओमान की नाधिरा अल हारथी और नेपाल के पुर बहादुर गुरुंग 'युक्ता' की मौत की पुष्टि कर दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, करीब दस पर्वतारोहियों के लापता होने की आशंका जताई गई है।
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जीपीएस ट्रैकर का रहस्य: जीवित हैं निम्सदाई या बर्फ में दफन है कोई राज?
- इस पूरे लापता मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सस्पेंस निर्मल पुर्जा के पास मौजूद ट्रैकिंग डिवाइस से आ रहे सिग्नलों ने पैदा किया है।
- नेपाल की प्रतिनिधि सभा के सदस्य मिंगमा ग्याबू शेरपा ने खुलासा किया है कि पुर्जा के ट्रैकिंग डिवाइस से लगातार हलचल (मूवमेंट) के संकेत मिल रहे हैं।
- शुरुआती सैटेलाइट डेटा से पता चला था कि बर्फीले तूफ़ान के थपेड़ों के कारण निम्सदाई तेजी से नीचे की ओर बह गए थे।
- लेकिन सस्पेंस तब बढ़ गया जब कुछ समय बाद उनकी लोकेशन में फिर से बदलाव देखा गया।
क्या वे होश में हैं और खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं? या फिर उनका डिवाइस किसी तैरते हुए बर्फ के टुकड़े के साथ हिल रहा है? विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ़ सिग्नल के आधार पर पुर्जा की वास्तविक हालत के बारे में पक्के तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता।
कौन हैं निर्मल पुर्जा? मौत को मात देने वाला वो जांबाज, जिसने 7 महीने में रचा था इतिहास
- निर्मल पुर्जा, जिन्हें पूरी दुनिया 'निम्सदाई' के नाम से जानती है, आधुनिक पर्वतारोहण के सबसे बड़े नामों में गिने जाते हैं।
- नेपाल में जन्मे पुर्जा ने पहले ब्रिटिश सेना और फिर रॉयल मरीन में सेवा दी। निर्मल पुर्जा कोई साधारण पर्वतारोही नहीं हैं, वे पहाड़ों के बेताज बादशाह माने जाते हैं।
- साल 2019 में उन्होंने महज सात महीने से भी कम समय में दुनिया की 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों पर सफलतापूर्वक चढ़ाई करके एक ऐसा विश्व रिकॉर्ड बनाया था, जिसने पूरी दुनिया को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया था।
- ब्रिटिश सेना और रॉयल मरीन में अपनी सेवाएं दे चुके 38 वर्षीय पुर्जा के पर्वतारोहण करियर की शुरुआत भी किसी फिल्मी कहानी जैसी है।
- साल 2012 में वे केवल एवरेस्ट बेस कैंप घूमने गए थे, लेकिन पहाड़ों के जादू ने उन्हें ऐसा जकड़ा कि उन्होंने वापस लौटने के बजाय सीधे शिखर की ओर बढ़ने का फैसला कर लिया।
- तब से लेकर आज तक वे हर बड़े खतरे से हंसते हुए बाहर निकले हैं, लेकिन इस बार ब्रॉड पीक का यह तूफ़ान उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी और कठिन परीक्षा ले रहा है।
समय कम, खतरा भारी: धीमी रफ्तार और घटती उम्मीदों के बीच रेस्क्यू
अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान और स्थानीय प्रशासन सभी उपलब्ध संसाधनों को जुटाकर लापता पर्वतारोहियों की तलाश में जुटे हैं। हालांकि, अधिकारियों ने यह स्वीकार किया है कि नेपाल की तुलना में पाकिस्तान के इन दुर्गम इलाकों में सेना की मुख्य भूमिका और हेलीकॉप्टरों की सीमित उपलब्धता के कारण बचाव अभियान काफी धीमा है। बर्फ के नीचे जिंदगी की तलाश करना समय के साथ और मुश्किल होता जा रहा है। जैसे-जैसे घंटे बीत रहे हैं, बर्फीली वादियों में जीवित बचे लोगों के मिलने की उम्मीदें तेजी से कम हो रही हैं। पूरी दुनिया इस वक्त प्रार्थना कर रही है कि पहाड़ों का यह बेटा एक बार फिर मौत को चकमा देकर सुरक्षित वापस लौट आए।
हर बीतते घंटे के साथ बढ़ रही चिंता
अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान और स्थानीय प्रशासन लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है और मौसम में सुधार होते ही हवाई खोज अभियान और तेज किया जाएगा। हालांकि, पर्वतारोहण विशेषज्ञ स्वीकार कर रहे हैं कि ऊंचाई, भीषण ठंड और लगातार खराब मौसम के कारण समय तेजी से निकल रहा है। इसके बावजूद परिवारों, साथियों और दुनिया भर के पर्वतारोहियों की उम्मीदें अभी भी निर्मल पुर्जा और अन्य लापता पर्वतारोहियों के सुरक्षित मिलने पर टिकी हुई हैं।
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