नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर कैप्टन प्रिया अधिकारी ने बाढ़-लैंडस्लाइड के बीच एक हफ्ते से कम समय में करीब 100 रेस्क्यू मिशन पूरे किए। इस दौरान उन्होंने सैकड़ों जिंदगियां बचाई हैं।
Who is Priya Adhikari: नेपाल में अचानक आई बाढ़ और लैंडस्लाइड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने और शवों को बाहर लाने के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इसी अभियान में नेपाल की हेलिकॉप्टर कैप्टन प्रिया अधिकारी लगातार उड़ान भरकर लोगों की मदद कर रही हैं। उन्होंने एक हफ्ते से भी कम समय में करीब 100 रेस्क्यू मिशन पूरे किए हैं।
कौन हैं प्रिया अधिकारी?
41 साल की प्रिया अधिकारी नेपाल की पहली महिला हेलिकॉप्टर कैप्टन हैं। उन्हें हाई-एल्टीट्यूड यानी बेहद ऊंचाई वाले इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए जाना जाता है। वह हिमालयी क्षेत्र में लगातार अभियान चला रही हैं। इनमें बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित रसुवा जिले का टिमुरे इलाका भी शामिल है। उनके रेस्क्यू मिशनों में बेहद ऊंचाई पर घायल पर्वतारोहियों को बचाना भी शामिल रहा है। कुछ अभियानों में उन्हें करीब 6,200 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरनी पड़ी है। हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू में अनुभव के कारण वह ऐसे मुश्किल इलाकों में भी हेलीकॉप्टर उड़ाने में माहिर हैं, जहां मौसम, ऊंचाई और जमीन की स्थिति लगातार चुनौती पैदा करती है।
पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई से हेलीकॉप्टर पायलट बनने तक का सफर
- प्रिया अधिकारी का एविएशन तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। उन्होंने एनवायरनमेंटल साइंस की पढ़ाई की थी और शुरुआत में केबिन क्रू के तौर पर काम किया।इसके बाद एक हेलीकॉप्टर जॉयराइड ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। इस उड़ान के बाद उनके मन में हेलीकॉप्टर उड़ाने की इच्छा पैदा हुई।
- इसके बाद वह हेलीकॉप्टर की ट्रेनिंग लेने के लिए फिलीपींस गईं। जरूरी फ्लाइंग घंटे पूरे करने के बाद वह साल 2017 में फुल-टाइम हेलीकॉप्टर पायलट बन गईं। आगे चलकर उन्होंने हाई-एल्टीट्यूड रेस्क्यू ऑपरेशन में विशेषज्ञता हासिल की।
नेपाल की अस्थिर जमीन और कीचड़ बनी बड़ी चुनौती
- प्रिया अधिकारी के मुताबिक, रेस्क्यू ऑपरेशन में सिर्फ हेलीकॉप्टर उड़ाना ही चुनौती नहीं है। प्रभावित इलाकों की जमीन भी पायलटों के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है।
- अचानक आई बाढ़ और मडस्लाइड के कारण कई जगहों पर मोटी और अस्थिर कीचड़ जमा हो गई है। ऊपर से देखने पर जमीन मजबूत नजर आ सकती है, लेकिन पायलट के लिए यह पता लगाना हमेशा संभव नहीं होता कि वह हेलीकॉप्टर का वजन सह पाएगी या नहीं।
- प्रिया अधिकारी ने बताया कि कुछ जगहों पर जमीन इतनी अस्थिर है कि हेलीकॉप्टर को उतारने के बाद इंजन सुरक्षित तरीके से बंद करना संभव नहीं होता।
- ऐसे में पायलटों को इंजन चालू रखना पड़ता है। बचे हुए लोगों को जल्दी से हेलीकॉप्टर में बैठाया जाता है और उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाता है।
- रेस्क्यू ऑपरेशन के शुरुआती दो दिनों में ही टिमुरे से 200 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस अभियान में कई हेलीकॉप्टर शामिल रहे। इनमें नेपाली सेना का ऑगस्टा एयरक्राफ्ट भी शामिल था।
हेलीकॉप्टर का इंतजार करते लोगों ने बढ़ाया हौसला
- इतनी बड़ी तबाही के बीच भी प्रिया अधिकारी के लिए बचे हुए लोग हिम्मत का स्रोत बने। उन्हें याद है कि प्रभावित इलाकों में लोग जमीन पर खड़े होकर हेलीकॉप्टर का इंतजार करते थे। जैसे ही हेलीकॉप्टर वहां पहुंचता या उतरता, लोग हाथ हिलाकर अपनी मौजूदगी का संकेत देते थे।
- प्रिया अधिकारी ने बताया कि ऐसे समय में वह लोगों को सिर्फ यही बताना चाहती थीं कि वे सुरक्षित हैं और बच गए हैं। उन्होंने कहा, "हर बार जब मैं वहां उतरती हूं, तो लोगों को अपने आस-पास और हाथ हिलाते हुए देखती हूं। मैं उनसे कहती हूं कि आप बच गए हैं।"
प्रिया अधिकारी ने बताया सबसे मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन
CNN के एंडरसन कूपर से बातचीत में प्रिया अधिकारी ने मौजूदा रेस्क्यू ऑपरेशन को अपने अनुभव का सबसे मुश्किल अभियान बताया। उनके मुताबिक, इस आपदा से निपटना 2015 के नेपाल भूकंप से भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण था। 2015 के भूकंप में तबाही का बड़ा हिस्सा एक संकरी घाटी में केंद्रित था, जबकि इस बार बाढ़ और लैंडस्लाइड के कारण हालात पहले से कहीं ज्यादा जटिल हैं।


