Cyber Fraud Case: ₹28,000 करोड़ के साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट नेटवर्क की जांच में ED ने वकील रशेश उपाध्याय उर्फ रशेश शाह को मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया। एजेंसी के मुताबिक, वह नेटवर्क की अहम कड़ी था। जानिए कौन है यह वकील और क्या हैं आरोप।
ED Cyber Fraud Case: करीब 28,000 करोड़ रुपये के लेनदेन वाले कथित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क की जांच में ED ने एक वकील को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान रशेश उपाध्याय के रूप में हुई है, जिसे रशेश शाह के नाम से भी जाना जाता है। एजेंसी का आरोप है कि वह इस नेटवर्क की अहम कड़ी था और बैंक खाते फ्रीज होने के बाद उन्हें दोबारा खुलवाने के लिए कथित तौर पर रिश्वत दिलाने में शामिल था। उसे मुंबई एयरपोर्ट पर उस समय पकड़ा गया, जब वह दिल्ली जाने वाली फ्लाइट में सवार होने वाला था। अब जांच का फोकस इस नेटवर्क के पैसों, कथित बिचौलियों और उन अधिकारियों पर है, जिन्होंने कथित तौर पर मदद की।
Rasesh Upadhyay Arrest: कौन है यह वकील, कहां से हुई गिरफ्तारी?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पणजी इकाई ने शनिवार को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रशेश उपाध्याय को हिरासत में लिया। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सीमा शुल्क विभाग और CISF ने उसे खोजने में ED की मदद की।
- आरोपी को दिल्ली जाने वाली उड़ान में सवार होने से पहले बोर्डिंग गेट के पास पकड़ा गया।
- इसके बाद उसे पणजी ले जाया गया और PMLA की विशेष अदालत में पेश किया गया।
- अदालत ने उसे 29 अक्टूबर तक ED की हिरासत में भेज दिया।
- इस गिरफ्तारी के बाद मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या सात हो गई।

₹28,000 Crore Cyber Fraud: क्या है पूरा मामला?
ED की जांच पूरे भारत में फैले कथित साइबर फ्रॉड और ‘डिजिटल अरेस्ट’ नेटवर्क से जुड़ी है। एजेंसी के मुताबिक, इस नेटवर्क से करीब 28,000 करोड़ रुपये के बैंकिंग लेनदेन और लगभग 2,900 करोड़ रुपये नकद जमा होने का मामला सामने आया है।
- जांच की शुरुआत गोवा पुलिस की 9 जून 2025 को दर्ज FIR के बाद हुई।
- आरोप है कि गोवा की एक महिला को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 21 मई से 2 जून 2025 के बीच 2.60 करोड़ रुपये अलग-अलग म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर करवाए गए।
- ED के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े खाते 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 300 से अधिक शिकायतों और 160 से ज्यादा FIR में सामने आए हैं।
- इन शिकायतों में 400 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का उल्लेख है।
ED के मुताबिक, खातों को खुलवाने में क्या थी भूमिका?
ED ने अदालत में दावा किया कि उपाध्याय नेटवर्क का ‘की नोड’ यानी अहम कड़ी था। एजेंसी के आरोप के मुताबिक, पुलिस शिकायतों के बाद जब संदिग्ध बैंक खाते फ्रीज किए गए, तो उन्हें कथित तौर पर अंगड़ियों के जरिए अधिकारियों को रिश्वत देकर दोबारा खुलवाया गया।
- ED का कहना है कि आरोपी ने वकील के रूप में पंजीकरण कराया था, लेकिन नेटवर्क से जुड़े आरोपियों या कंपनियों की ओर से अदालत में पेश होने के लिए वकालतनामा दाखिल नहीं किया।
- गोवा की महिला से ठगी गई रकम कथित तौर पर करीब 400 म्यूल खातों में पहुंचाई गई। ये खाते कमोडिटी, ट्रैवल और विदेशी मुद्रा से जुड़ी कंपनियों के बताए गए हैं।
- एजेंसी के मुताबिक, इन खातों से नकदी निकालकर RBI से लाइसेंस प्राप्त मनी चेंजर्स के जरिए विदेशी मुद्रा में बदला गया।

Digital Arrest Scam: जांच में अब आगे क्या?
ED अब कथित तौर पर रिश्वत लेने वाले अधिकारियों, अंगड़ियों और दूसरे बिचौलियों की भूमिका की जांच कर रही है। एजेंसी का मकसद नेटवर्क के जरिए हुए लेनदेन और अपराध से हासिल रकम के पूरे प्रवाह का पता लगाना है।
- ‘डिजिटल अरेस्ट’ में ठग खुद को पुलिस या दूसरी जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो या ऑडियो कॉल पर लोगों को डराते हैं और पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं।
- भारत में इसका कोई कानूनी आधार नहीं है। ऐसे साइबर फ्रॉड की शिकायत हेल्पलाइन 1930 या cybercrime.gov.in पर की जा सकती है।
- रशेश उपाध्याय इस मामले में सातवें गिरफ्तार आरोपी हैं। उन्हें 29 अक्टूबर तक ED की हिरासत में भेजे जाने की खबर है। आरोपों की जांच जारी है।


