Nisha Kumari Bhagat Biography: जानिए कौन थीं गुमला की निशा कुमारी भगत, जिन्होंने सरना संस्कृति, आदिवासी अस्मिता और सामाजिक अधिकारों के लिए आवाज उठाई। विधानसभा चुनाव भी लड़ चुकी थीं।
Who Was Nisha Kumari Bhagat Jharkhand: झारखंड के गुमला की युवा सामाजिक कार्यकर्ता निशा कुमारी भगत अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनके असामयिक निधन की खबर से जिले के सामाजिक और संगठनात्मक क्षेत्र में शोक है। आदिवासी अस्मिता, सरना संस्कृति और जल, जंगल, जमीन के अधिकारों को लेकर मुखर रहने वाली निशा ने कम उम्र में ही अपनी अलग पहचान बना ली थी। सामाजिक आंदोलनों से लेकर चुनावी राजनीति तक उनका सफर चर्चा में रहा। जानिए आखिर कौन थीं निशा कुमारी भगत और किन मुद्दों को लेकर वह लगातार आवाज उठाती थीं?
कहां की रहने वाली थीं निशा कुमारी भगत?
निशा गुमला शहर के बड़ाईक मोहल्ला स्थित डीएसपी रोड की रहने वाली थीं। उनके पिता हांदू भगत झारखंड के अलग-अलग आंदोलनों से जुड़े रहे हैं। पिता के सामाजिक और आंदोलनकारी विचारों का असर निशा पर भी पड़ा। उन्होंने दुर्गापुर के डीएसएमएस संस्थान से होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद बेंगलुरु में नौकरी शुरू की, लेकिन कुछ समय बाद नौकरी छोड़कर गुमला लौट आईं और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय हो गईं।
किन मुद्दों को लेकर उठाती थीं आवाज?
गुमला लौटने के बाद निशा ने आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों को अपने काम का केंद्र बनाया। सरना धर्म, आदिवासी परंपराओं, सरना झंडे की पहचान और जल, जंगल, जमीन पर समुदाय के अधिकारों को लेकर वह लगातार सक्रिय रहीं। उनकी प्रमुख गतिविधियों में शामिल थे-
- आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक पहचान के संरक्षण की पैरवी।
- सरना और सनातन परंपराओं को एक सूत्र में जोड़ने की बात।
- धर्मांतरण के विरोध में सामाजिक स्तर पर आवाज उठाना।
- आदिवासी महिलाओं और युवतियों को संगठित करना।
- समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना।
केंद्रीय सरना समिति में मिली थी बड़ी जिम्मेदारी
निशा के सामाजिक सफर में सितंबर 2025 एक अहम पड़ाव रहा। इस दौरान उन्हें केंद्रीय सरना समिति की केंद्रीय महिला अध्यक्ष बनाया गया। इस जिम्मेदारी के बाद उन्होंने संगठन के जरिए महिलाओं को जागरूक करने और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने की पहल की। दिसंबर 2025 में धर्मांतरण के विरोध में मुंडन कराने के बाद भी वह चर्चा में आई थीं। उनके इस कदम ने उन्हें एक बार फिर स्थानीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया था।
विधानसभा चुनाव भी लड़ चुकी थीं निशा
निशा ने सामाजिक गतिविधियों तक ही खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने राजनीति में भी अपनी जगह बनाने की कोशिश की। वर्ष 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में उन्होंने गुमला सीट से झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इस तरह आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों को वह सामाजिक संगठनों के साथ-साथ राजनीतिक मंच पर भी उठाती रहीं।
निशा के निधन से गुमला में शोक
रांची के पिठौरिया में उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद गुमला में शोक का माहौल है। कम उम्र में सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय पहचान बनाने वाली निशा के निधन से उनके परिचितों और संगठन से जुड़े लोगों में दुख है। उनकी जीवन यात्रा पढ़ाई और नौकरी से शुरू होकर सामाजिक सक्रियता, संगठनात्मक जिम्मेदारी और चुनावी राजनीति तक पहुंची थी।












