पुणे में विप्रो की एक पूर्व कर्मचारी ने अपनी बॉस और अन्य सीनियर लीडर्स पर जबरन इस्लाम अपनाने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। इससे पहले नासिक स्थित TCS में भी इसी तरह का मामला सामने आया था। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या IT सेक्टर में धार्मिक भेदभाव के मामले लगातार बढ़ रहे हैं?

Wipro Pune Religion Conversion Allegation: TCS नासिक के बाद अब पुणे स्थित Wipro कंपनी में जबरन धर्म परिवर्तन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। विप्रो के पुणे स्थित कैंपस में काम कर चुकी एक महिला कर्मचारी ने अपनी एक्स बॉस पर धार्मिक आधार पर उत्पीड़न करने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि लगातार मानसिक प्रताड़ना और दबाव के कारण उसे आखिरकार अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी। इस मामले में उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और साथ ही राज्य मानवाधिकार आयोग का भी दरवाजा खटखटाया है। शिकायत में जिस महिला बॉस का नाम लिया गया है, वह बेंगलुरु में रहती हैं और वहीं से काम करती थीं।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

इस्लाम अपनाने का दबाव बनाने का आरोप

महिला के अनुसार, वह पुणे के हिंजेवाड़ी स्थित Wipro कैंपस में कार्यरत थी। इस दौरान कुछ सीनियर मैनेजरों और टीम लीडरों ने उसकी धार्मिक मान्यताओं को लेकर उसे निशाना बनाया। उसका आरोप है कि उस पर लगातार इस्लाम धर्म अपनाने और उससे जुड़ी धार्मिक परंपराओं का पालन करने का मानसिक दबाव बनाया गया। महिला का कहना है कि जब उसने इसका विरोध किया तो उसके साथ कार्यस्थल पर व्यवहार और अधिक खराब हो गया।

खराब परफॉर्मेंस रिव्यू और नौकरी से निकालने की धमकी का दावा

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि विरोध करने के बाद उसकी मैनेजर ने उसे खराब परफॉर्मेंस रेटिंग देने और नौकरी से निकालने की धमकी दी। महिला का कहना है कि लगातार तनाव, मानसिक दबाव और कथित उत्पीड़न के कारण उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हुई और अंततः उसे नौकरी छोड़ने का फैसला करना पड़ा। महिला का दावा है कि उसने कंपनी के आंतरिक तंत्र के माध्यम से अपनी शिकायत रखने की कोशिश की, लेकिन उसे उचित समाधान नहीं मिला। इसके बाद उसने कानूनी कार्रवाई का रास्ता चुना और पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुणे पुलिस ने आरोपों की जांच शुरू कर दी है।

पुणे पुलिस ने शुरू की जांच

इस मामले पर जानकारी देते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बालाजी पंढारे ने बताया कि Wipro में कार्यरत एक महिला प्रोजेक्ट मैनेजर ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा, "महिला ने आरोप लगाया है कि उसकी महिला बॉस, जो बीमा क्षेत्र से जुड़े कार्यों को संभालती थीं, ने उसके बारे में आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।" पंढारे के अनुसार, महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि बाद में उसकी बॉस ने उसे इस्तीफा देने के लिए कहा। इसके बाद उसने पुलिस के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि जिस महिला अधिकारी के खिलाफ शिकायत की गई है, वह बेंगलुरु में रहती हैं और वहीं से कार्य करती हैं। पुलिस इस बात की भी जांच करेगी कि शिकायत मिलने के बाद कंपनी ने क्या कार्रवाई की और यदि की तो उसका स्वरूप क्या था।

हिंदू जनजागृति समिति की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आया मामला

बुधवार को गैर-लाभकारी संस्था हिंदू जनजागृति समिति ने पुणे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान महिला ने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी। उसने बताया कि वर्ष 2019 से 2025 तक Wipro में काम करने के दौरान उसे किन परिस्थितियों और कथित परेशानियों का सामना करना पड़ा।

कंपनी के रिकॉर्ड और आरोपों की जांच में जुटी पुलिस

पुलिस अब महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की विस्तार से जांच कर रही है। इसके साथ ही कंपनी के आंतरिक रिकॉर्ड और उपलब्ध दस्तावेजों की भी समीक्षा की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से तथ्य और साक्ष्य मौजूद हैं।

Wipro ने कहा- भेदभाव और उत्पीड़न के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए Wipro ने कहा कि कर्मचारियों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। कंपनी ने अपने बयान में कहा, "Wipro किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार, भेदभाव, उत्पीड़न या ऐसे किसी भी व्यवहार के प्रति जीरो-टॉलरेंस नीति अपनाता है, जो किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता को प्रभावित करता हो।" कंपनी ने यह भी कहा कि वह जांच में अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और पुणे पुलिस को सभी जरूरी दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध करा चुकी है। कंपनी ने दोहराया कि वह सभी कर्मचारियों के लिए सुरक्षित, समावेशी और सम्मानजनक कार्यस्थल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

IT कंपनियों में कर्मचारियों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता पर फिर छिड़ी बहस

इस घटना के सामने आने के बाद एक बार फिर कॉर्पोरेट सेक्टर, खासकर IT कंपनियों में कर्मचारियों की धार्मिक स्वतंत्रता, कार्यस्थल पर सम्मान और सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस तरह के मामलों ने कार्यस्थल पर भेदभाव और उत्पीड़न से जुड़े नियमों तथा शिकायत निवारण व्यवस्था की प्रभावशीलता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

TCS नासिक मामले का भी हुआ जिक्र

जांच के दौरान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक यूनिट से जुड़े एक पुराने मामले का भी उल्लेख सामने आया। यह मामला इस वर्ष की शुरुआत में चर्चा में आया था, जब कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उस मामले में कई पीड़ित सामने आए थे और कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई थी। हालांकि दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं, लेकिन इन घटनाओं ने कार्यस्थलों पर धार्मिक स्वतंत्रता और कर्मचारी अधिकारों को लेकर बहस को और तेज कर दिया है।