Yogi Adityanath Statement: हरिद्वार में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामभक्तों का अपमान भारत की विरासत का अपमान था। उन्होंने यूपी में कानून व्यवस्था, राम मंदिर, विकास, सुशासन और आश्रम पद्धति से मिले प्रशासनिक अनुभव पर विस्तार से अपनी बात रखी।
कभी उत्तर प्रदेश को अराजकता, दंगों और असुरक्षा के प्रतीक के रूप में देखा जाता था। विरासत को बोझ समझा जाता था और आस्था के प्रतीकों को उपहास का विषय बनाया जाता था। लेकिन समय बदला है। अब वही उत्तर प्रदेश विकास, सुशासन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का मॉडल बनकर देश के सामने खड़ा है। यह बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरिद्वार में स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज की श्री विग्रह मूर्ति स्थापना समारोह को संबोधित करते हुए कही।
सीएम योगी ने कहा कि एक दौर ऐसा भी था, जब रामभक्तों पर गोलियां चलीं, उन्हें अपमानित किया गया। यह केवल रामभक्तों का नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी विरासत और आध्यात्मिक मूल्यों का अपमान था। उसी मानसिकता का परिणाम था कि उत्तर प्रदेश दंगों, लूट और गुंडागर्दी का अड्डा बन गया। न बेटी सुरक्षित थी, न व्यापारी। लेकिन जब सरकार ने विरासत का सम्मान करना शुरू किया, तो प्रदेश की तस्वीर ही बदल गई।
दंगा-दंगाई दोनों गायब, अब यूपी में सब चंगा
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज उत्तर प्रदेश में न अराजकता है, न फसाद, न कर्फ्यू। दंगा और दंगाई, दोनों गायब हो चुके हैं। अब कर्फ्यू दंगाइयों पर लगता है, आम नागरिक पर नहीं। यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि स्पष्ट नीति और साफ नीयत का परिणाम है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी ने सोचा था कि 500 वर्षों बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण होगा? लेकिन आज यह सच्चाई है।
सीएम योगी ने कहा कि आज प्रदेश में बेटी भी सुरक्षित है और व्यापारी भी। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
आश्रम पद्धति से सीखा प्रशासन का असली पाठ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने प्रशासनिक अनुभव को लेकर एक महत्वपूर्ण बात साझा की। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर पूछते हैं कि बिना किसी औपचारिक प्रशासनिक प्रशिक्षण के आप इतना बड़ा प्रदेश कैसे चला रहे हैं। मेरा उत्तर होता है कि मैं आश्रम व्यवस्था से जुड़ा हूं। भारत का संन्यासी आश्रम पद्धति में ही प्रशासन और प्रबंधन सीखता है। यही असली एमबीए है।
उन्होंने कहा कि भारत की प्रशासनिक, आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति की जड़ें आश्रम और गुरुकुल परंपरा में हैं, जहां कृषि, आयुर्वेद, खगोल विज्ञान, शिल्प और प्रशासन का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता था। इसी विरासत के बल पर उत्तर प्रदेश आज अराजकता से निकलकर सुशासन और विकास की राह पर बढ़ा है।
माघ मेले में 21 करोड़ श्रद्धालुओं की आस्था
सीएम योगी ने बताया कि माघ मेले में अब तक 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालु मां गंगा, मां यमुना और मां सरस्वती के त्रिवेणी संगम में स्नान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज, हरिद्वार, बदरीनाथ और केदारनाथ अब केवल धार्मिक स्थल नहीं रहे, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के केंद्र बन चुके हैं। इन आस्था केंद्रों को सम्मान और संरक्षण मिलने का सकारात्मक असर देश और प्रदेश दोनों की अर्थव्यवस्था पर दिख रहा है।
भारत केवल भूगोल नहीं, ऋषि परंपरा की चेतना है
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत कोई साधारण भौगोलिक इकाई नहीं है, बल्कि यह ऋषि परंपरा की तपस्या से निर्मित राष्ट्र है। इतिहास गवाह है कि जब-जब हमने अपनी सभ्यता और संस्कृति की उपेक्षा की, पतन की ओर बढ़े। वैदिक भारत आत्मनिर्भर सभ्यता का प्रतीक था, जहां गांव आत्मनिर्भर इकाइयां थीं, किसान उत्पादक था, कारीगर उद्यमी था और व्यापारी समाज को जोड़ने का माध्यम।
उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत तक थी। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत फिर से दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में स्थान बना रहा है। यह उसी सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण का परिणाम है।
संत समाज का समर्थन
समारोह में संत समाज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘उत्तर प्रदेश का शेर’ बताया। संतों ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में रामराज्य जैसा वातावरण दिखाई देता है। भय, अराजकता और उन्माद की जगह आज सुरक्षा और विश्वास का माहौल है।
इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद भारती जी महाराज सहित कई संत और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
सीएम योगी ने अपने संबोधन में यह स्पष्ट संदेश दिया कि जब विरासत का सम्मान होता है, तो शासन मजबूत होता है और समाज स्वतः सशक्त बनता है। यही नए भारत और नए उत्तर प्रदेश की पहचान है।


