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पेट्रोल-डीजल सस्ता होने से सरकारी खजाने पर पड़ेगा असर, राजकोषीय घाटा भी बढ़ेगा, जानिए क्या कहता है रिपोर्ट..

डीजल और पेट्रोल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में कटौती से जहां आम आदमी को राहत मिली है, वहीं सरकार के इस कदम से खजाने में 45,000 करोड़ रुपये का असर पड़ेगा। इससे राजकोषीय घाटा  भी 0.3 फीसदी बढ़ जाएगा।

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New Delhi, First Published Nov 4, 2021, 6:39 PM IST
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नई दिल्ली : डीजल-पेट्रोल (petrol-diesel) पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी घटाकर केंद्र सरकार ने भले ही आम आदमी को राहत दी है। लेकिन, इससे सरकारी खजाने पर 45,000 करोड़ रुपये का असर पड़ेगा। इससे केंद्र का राजकोषीय घाटा भी 0.3 प्रतिशत बढ़ जाएगा। गुरुवार को जारी एक जापानी ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल खपत के हिसाब से, इस आश्चर्यजनक कदम से पूरे वित्त वर्ष के लिए राजकोष पर एक लाख करोड़ रुपये का असर पड़ेगा। यह देश की GDP का 0.45 फीसदी होगा।

राजकोषीय घाटा बढ़ेगा
चालू वित्त वर्ष के सात महीने बीत चुके हैं। इस कदम से बाकी बचे महीनों के लिए, राजकोष पर 45,000 करोड़ रुपये का असर पड़ेगा। इससे चालू वित्त वर्ष में भी राजकोषीय घाटा बढ़ेगा। ब्रोकरेज के मुताबिक अब उसे उम्मीद है कि राजकोषीय घाटा 6.5 प्रतिशत पर आ जाएगा। जबकि, पहले का अनुमान 6.2 प्रतिशत का था। अभी भी यह 6.8 प्रतिशत के लक्ष्य से कम रहेगा।

एक्साइज ड्यूटी में अब तक की सबसे बड़ी कटौती
बता दें कि केंद्र सरकार ने बुधवार को दीपावली की पूर्व संध्या पर पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की घोषणा की थी। एक्साइज ड्यूटी में कटौती अब तक की सबसे बड़ी कटौती है। इसके साथ ही मार्च 2020 और मई 2020 के बीच पेट्रोल और डीजल पर टैक्स में 13 रुपए और 16 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी का एक हिस्सा वापस ले लिया गया है। उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी से पेट्रोल पर केंद्रीय कर 32.9 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 31.8 रुपए प्रति लीटर हो गया था।

कई राज्यों ने घटाए वैट
हाल के महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में वैश्विक स्तर पर उछाल देखा गया है। इस वजह से हाल के हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की घरेलू कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे मुद्रास्फीति संबंधी दबाव बढ़ गया है। एक्साइज ड्यूटी को कम करते हुए, केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए राज्यों से पेट्रोल और डीजल पर वैट कम करने का भी आग्रह किया था। इसके बाद दिल्ली (delhi), उत्तर प्रदेश (uttar pradesh), मध्यप्रदेश (madhya pradesh), गोवा (goa), कर्नाटक (karnatka), गुजरात (gujrat) उत्तराखंड (uttarakhand), त्रिपुरा (tripura), हरियाणा (haryana) और बिहार (bihar) में वैट घटाया गया है।

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