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25 गाय के लिए आधी रात को खुला द्वारका मंदिर, मन्नत पूरी हुई तो गायों के साथ 450 KM पैदल दर्शन करने आया मालिक

अभी तक किसी बड़े नेता या कोई सेलिब्रिटी के लिे भगवान के मंदिर देर रात या आधी रात तक खुले रहे हैं। लेकिन गुजरात के 'द्वारका' के इतिहास में ऐसा पहली बार देखने को मिला, जब 25 गायों के लिए आधी रात को द्वारकाधीश का मंदिर खोला गया। 

 first time in the history of Dwarka shree dwarkadhish temple open in mid night for 25 cows kpr
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First Published Nov 24, 2022, 4:12 PM IST

द्वारका (गुजरात). संभवता यह पहला मौका होगा जब भगवान श्रीकृष्ण की नगरी 'द्वारका' में द्वारकाधीश मंदिर के दरवाजे 25 गायों के लिए खोले गए हो। वह भी जब आधी रात हो चुकी थी, तब मंदिर के विशेष परिस्थितियों में कपाट खोले गए। हैरानी की बात यह थी कि ये गायें अपने मालिक के साथ 450 किलो मीटर पैदल चलकर द्वारका पहुंची थी। इस दौरान कोई VIP नहीं था, फिर भी गर्भगृह बंद करने के बाद दोबारा खोला।

गायों ने पहले परिक्रमा की, फिर प्रसाद भी खाया
दरअसल, 25 गायों को द्वारकाधीश भगवान के दर्शन कराने पहुंचे मालिक का नाम महादेव देसाई हैं। जो कि मूल रुप से कच्छ जिले के रहने वाले हैं। वह डेयरी काम करते हैं। इसलिए गाये ही उनके लिए सबकुछ हैं। वह बुधवार रात करीब 12 बजे के बाद 450 किमी की पैदल यात्रा कर द्वारका पहुंचे। उनके साथ उनकी गायों ने भी गर्भगृह तक जाकर पहले दर्शन किए, फिर  द्वारकाधीश मंदिर की परिक्रमा की। इसके बाद मालिक के साथ-साथ गायों ने भी प्रसाद खाया।

मालिक ने द्वारकाधीश से मांगी थी मन्नत, पूरी होने पर किए दर्शन
गायों के मालिक महादेव ने बताया कि पिछले दिनों गुजरात समेत पूरे देश में लंपी वायरस कहर बरपा रहा था। इस लंपी के चलते कई गायों की मौत हो गई थी। उनकी गौशाला की खुद 25 गाय लंपी वायरस बिमारी से संक्रमित हो गई थीं। तभी मैंने भगवान द्वारकाधीश से मन्नत मांगी थी कि अगर उनकी गायें ठीक हो जाएंगी तो वह उनके साथ पैदल यात्रा कर श्रीकृष्ण के दर्शन करने द्वारका आएंगे। इसलिए अब मन्नत पूरी हुई तो वह उन्हीं गायों को लेकर यहां पहुंचे हैं।

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इस वजह से रात में गायों को मंदिर में दी गई एंट्री
बता दें कि वैसे तो गौशला मालिक बुधवार को दिन में गायों के साथ द्वारका पहुंच गए थे। लेकिन दिन में  द्वारकाधीश भगवान के दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ होती है। ऐसे में अगर मंदिर तक गायों को प्रवेश दिया जाता तो व्यवस्था बिगड़ सकती थी। इसलिए मंदिर सीमीति ने बैठक कर फैसला किया कि रात 12 बजे गायों के दर्शन के लिए कपाट खोले जाएंगे। क्योंकि श्रीकृष्ण खुद गायों के ही भक्त थे, तो वे रात में ही अब इन गायों को दर्शन देंगे।

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