दुनिया में करीब 10 लाख बच्चों में से कोई एक इस तरह का बच्चा जन्मता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अमृतसर में पिछले 6 साल में ऐसे तीसरे बच्चे का जन्म हुआ है। आम बोलचाल में इसे प्लास्टिक बेबी या गुड़िया कहते हैं। यह बच्चा एक जेनेटिक डिसआर्डर का शिकार है। इसे चिकित्सकीय भाषा में कोलोडियन बेबी कहते हैं। इस बच्चे का मुंह और होंठ मछली जैसे होते हैं। इसकी चमड़ी लगातार उतरती रहती है। जब यह बच्चा रोता है, तो उसकी चमड़ी फटने लगती है।

अमृतसर, पंजाब. दुनिया में करीब 10 लाख बच्चों में से कोई एक इस तरह का बच्चा जन्मता है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अमृतसर में पिछले 6 साल में ऐसे तीसरे बच्चे का जन्म हुआ है। आम बोलचाल में इसे प्लास्टिक बेबी या गुड़िया कहते हैं। यह बच्चा एक जेनेटिक डिसआर्डर का शिकार है। इसे चिकित्सकीय भाषा में कोलोडियन बेबी कहते हैं। ऐसे बच्चों के मुंह और होंठ मछली जैसे होते हैं। इसकी चमड़ी सांप की केंचुली की लगातार उतरती रहती है। जब यह बच्चा रोता है, तो उसकी चमड़ी फटने लगती है। यह तीसरा कोलेडियन बेबी (यह तस्वीर प्रतीकात्मक है) कोट खालसा क्षेत्र में रहने वाले गगनदीप सिंह की पत्नी बलजीत कौर ने जन्मा है। अपने घर आए इकलौते बच्चे की यह हालत देखकर मां-बाप को कुछ समझ नहीं आ रहा कि वे खुशियां मनाएं या दु:ख। 

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15 दिन बाद उतरने लगी थी चमड़ी...
कोलेडियन बेबी का जन्म महीनेभर पहले हुआ है। इसका नाम गुरसेवक रखा गया है। इस तरह का बच्चा जब जन्मता है, तो उसके शरीर पर चमड़ी की एक अलग परत चढ़ी होती है। आंखों पर भी चमड़ी चढ़ी होती है। जन्म के करीब 15 दिन बाद बच्चे के शरीर से चमड़ी उतरने लगी। बच्चे के पिता एक कंपनी में डिलीवरी बॉय हैं। बच्चे को गुरुनानक देव अस्पताल में रखा गया है। यहां के शिशु रोग विशेषज्ञ संदीप अग्रवाल के अनुसार, यह एक जेनेटिक डिसआर्डर है। मां-बाप के गुणसूत्रों में संक्रमण से ऐसे बच्चे जन्मते हैं। इनकी स्किन रबड़ की तरह होती है। बता दें कि अमृतसर में पहले भी दो कोलेडियन बेबी जन्म ले चुके हैं। हालांकि उनकी मौत हो गई थी। पहला कोलेडियन बेबी वर्ष 2014, जबकि दूसरा 2017 में जन्मा था। बहरहाल, इस तीसरे कोलेडियन बेबी के सभी अंग ठीक से काम कर रहे हैं। डॉक्टर उम्मीद जता रहे हैं कि यह बच्चा ठीक हो जाएगा।