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आखिर ऐसा क्यों बोल रहे हैं सिद्धू, कहा-हालात नहीं सुधरे तो पंजाब में होगा 'युद्ध', रहने लायक नहीं बचेगा

पंजाब कांगेस चीफ नवजोत सिंह सिद्धू ने अलर्ट करते हुए कहा कि अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले समय में पंजाब में गृह युद्ध होगा। इतना ही नहीं प्रदेश रहने लायक नहीं रहेगा। उन्होंने इसकी वजह भी बताई। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पंजाब में इतना कर्जा हो गया है कि उतारना मुश्किल है। 

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Amritsar, First Published Nov 11, 2021, 6:35 PM IST
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चंडीगढ़. पंजाब में मचे सियासी घमासान के बीच कांग्रेस पार्टी प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (navjot singh sidhu) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लोगों को कड़ी चेतावनी दी है। सिद्धू ने अलर्ट करते हुए कहा कि अगर हालात नहीं सुधरे तो आने वाले समय में पंजाब में गृह युद्ध होगा। इतना ही नहीं प्रदेश रहने लायक नहीं रहेगा। उन्होंने इसकी वजह भी बताई। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पंजाब में इतना कर्जा हो गया है कि उतारना मुश्किल है। देश का पहला कर्जाई राज्य बन गया है।

सिद्धू ने बताया पंजाब पर है कितना कर्ज
दरअसल, गुरुवार को पंजाब विधानसभा (punjab assembly) में विशेष सत्र था। इसी बीच वह बीच सिद्धू सेशन में पत्रकारों से बात करने के लिए पहुंचे। जहां उन्होंने यह बात कही। सिद्धू ने कहा कि कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 तक पंजाब पर 4 लाख करोड़ कर्ज होगा। अगर यही हालात रहे तो राज्य में गृह युद्ध होगा। लोग अपना स्टेट छोड़ने के लिए मजबूर हो जाएंगे।

सस्ती बिजली और सस्ते डीजल-पेट्रोल में पंजाब नंवर-1
बता दें कि सिद्धू ने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि हमारे राज्य के आर्थिक हालात गंभीर हैं। 24% आय तो सिर्फ ब्याज चुकाने में जा रहा है। पंजाब एक आदमी पर सिर्फ 870 रुपए खर्च करता है, जबकि अन्य राज्यों की औसत 3,500 रुपए हैं। सबसे ज्यादा गोवा 14,804 और हरियाणा 6,038 रुपए खर्च करता है।' उन्होंने कहा कि हमारी राज्य सरकार जनता के हित के लिए सस्ते डीजल-पेट्रोल पर करीब 6  हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है। वहीं सस्ती बिजली पर 3 हजार करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। इतना ही नहीं मुफ्त बिजली पर ही 2,600 करोड़ रुपए खर्च हो रहा है।

कर्ज के चलते किसान कर रहे आत्महत्या
पंजाब कांग्रेस चीफ ने कहा कि कर्ज के चलते किसान आज देश में सबसे ज्यादा आत्महत्या कर रहे हैं। कर्ज इतना हो गया है कि किसान आंदोलन खत्म होने के बाद खुशकुशी के मामले नहीं थमेंगे। क्योंकि पिछले 20 सालों से कोई नई कृषि नीति नहीं आई है। किसान पैदा तो ज्यादा कर रहा है, लेकिन वह कर्ज में नीचे दबते जा रहा है। केंद्र सरकार जो नए कृषि कानून लेकर आई  वह पंजाब में अकाली सरकार की नकल है। 2013 में बादल सरकार के पंजाब फार्मिंग एक्ट की नकल है। 

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