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राजस्थान का अनोखा जहाज स्कूलः इस सरकारी स्कूल में पढ़ने से ज्यादा बच्चे तो, रोज इसे देखने आ जाते है यहां

देश में सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति किसी से छुपी हुई नहीं है, लेकिन राजस्थान के अलवर में स्थित यह शानदार सरकारी स्कूल पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि यहां जितने बच्चे पढ़ते हैं उससे कहीं ज्यादा हर रोज स्कूल देखने आ जाते है।

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First Published Oct 1, 2022, 4:49 PM IST

अलवर. राजस्थान या देश के किसी भी राज्य में आपने सोचा है कभी बच्चे जहाज में पढ़ रहे हो।  राजस्थान के अलवर में ऐसा हुआ है और हो रहा है।  अलवर में ग्रामीण इलाके में एक सरकारी स्कूल ऐसा है जिसमें 400 बच्चे पढ़ रहे हैं और यह क्रूज की शक्ल का है । इसके निर्माण में 40 लाख अब तक खर्च हो चुके हैं। वो भी बिना किसी सरकारी मदद के।  गांव वालों ने और कुछ सामाजिक संस्थाओं ने मदद देकर यह ऐसा शानदार स्कूल तैयार किया है कि हर रोज सैकड़ों लोगों  तो इसे देखने आते हैं  । यह स्कूल अलवर जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर हल्दनी गांव में स्थित है स्कूल का नाम राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय हल्दीना है । 

सभी क्लास स्मार्टरूम है यहां कि
इसे स्कूल में कक्षा 6 से लेकर कक्षा 12 तक 400 बच्चे पढ़ते हैं । सभी क्लासरूम स्मार्ट टीवी से लैस है और पूरा सिस्टम बिल्कुल अप टू डेट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की तरह है । स्थानीय निवासी राजेश कुमार ने बताया कि  ग्रामीणों ने मिलकर सहगल फाउंडेशन की मदद से बनाया है । इस स्कूल पर इंडियन नेवी का लोगो भी लगा हुआ है । 

खिड़की, दरवाजे भी क्रूज की नकल के है
स्कूल में जितने भी खिड़की दरवाजे हैं वह सभी क्रूज की जैसी शक्ल के हैं।  स्कूल की पहली मंजिल पर एक्टिविटी रूम है और उसके बाद छत है।  छत पर स्टील की रेलिंग लगी हुई है और छत गोलाई में बनाई गई है ताकि क्रूज का जैसा अनुभव हो सके। दीवारों पर डॉल्फिन और अन्य जल चर की फोटो , उसके साथ लहरों और अन्य पिक्चर बनाई गई हैं।  ताकि पूरा अनुभव क्रूज सा रहे।  

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि 2 साल तक कोरोनावायरस के  कारण स्कूल-कॉलेज बंद थे। इस सेशन से ही सब कुछ शुरू हो सका है और कुछ समय पहले ही इस स्कूल को फिर से नए रूप में बनाया गया है। अब स्कूल में जितने बच्चे पढ़ते हैं उससे कहीं ज्यादा लोग हर दिन इस स्कूल को  देखने आते हैं और स्कूल के साथ सेल्फी लेते हैं। राजस्थान में अपने तरह का यह पहला ही स्कूल है।

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