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बाड़मेर जिले में मौत को मात देकर 12 घंटे बाद जीत गई जिंदगी, कुएं में फंसा मजदूर सुरक्षित आया बाहर

एसडीआरएफ की टीम ने बारह घंटे के प्रयास के बाद भी, नहीं छोड़ी उम्मीद। कुएं में फंसे मजदूरों को बाहर निकालकर ही दम लिया। उनकी मेहनत देख अफसर ने भी दिलदारी दिखाते हुए, रेस्क्यू में शामिल वर्करों को बांट दिए रुपए। जानिए इस रेस्क्यू मिशन के बारें में...

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Barmer, First Published Jun 3, 2022, 5:59 PM IST

जयपुर. एक कहावत है जाको राखे साइयां मार सके न कोए यही बोल आज राजस्थान के बाड़मेर में सच होते नजर आए, जहां कुएं से मिट्टी निकालने के दौरान उसमें दो मजदूर दब गए। उनको बाहर निकालने के लिए बारह घंटे तक कार्मिक जुटे रहे। उम्मीद का दामन थामे रखा, मौत को मात करने की जिद दिमाग में बैठा ली और माटी खोदते गए। आखिर निराशा का अंत हुआ, मजदूर ने बचाव दल से बारह घंटे के बाद आवाज मिलाई, उसे गंभीर हालत मे बाहर निकाला गया। मामला बाड़मेर जिले के धोरी मन्ना क्षेत्र का है। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की सबसे बड़ी बात ये है कि कार्मिकों का जान बचाने का जज्बा अफसर को इतना पसंद आया कि उन्होनें लगे हाथ सारे कार्मिकों को इनाम में नोट बांट दिए। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) टीम ने ये रेस्क्यू का कार्य किया है। 

जान बचाने की जिद लिए, मौत के पंजे से छु़ड़ा लाए जिंदगी

दरअसल बाडमेन के धोरीमन्ना क्षेत्र में स्थित खुमे की बेरी गांव में यह हादसा हुआ था। जहां गांव मे बने कुएं में दो मजदूर काम कर रहे थे। उनके द्वारा वहां खुदाई का काम करते समय अचानक से कुआं ढह गया था। हादसे के कुछ समय बाद ही एक मजदूर को बाहर निकाल लिया गया था। जबकि दूसरा श्रमिक 150 फीट गहरे कुएं में दब गया था। जिसे बचाने के लिए रेस्क्यू टीम ने रेस्क्यू आपरेशन शुरू किया। लेबर की जान बचाने की जिद ऐसी थी रेस्क्यू कर्मियो की टीम में की उन्होने अपने मिशन के दौरान बारह घंटे तक कुछ खाया नहीं और रेस्क्यू करने में लगे रहे। करीब 12 घंटे के बाद उसे जिंदा निकाल लिया गया। मजदूर को बाहर निकालने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसकी हालत में सुधार हो रहा है।

 रेस्क्यू टीम के काम से खुश होकर हेड ने दिया ये इनाम
इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एसडीआरएफ) के हेड एसपी पंकज चौधरी रिस्पांस टीम के जान बचाने के जज्बे से इतने खुश हुए कि उन्होनें रेस्क्यू लीड करने वाले को पांच हजार और रेस्क्यू करने वाले हर व्यक्ति एक एक हजार रुपए बांट दिए। इसके साथ SDRF के कर्मचारियों को प्रमाण पत्र भी दिए। 

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