तीन बेटियों के पिता श्रीराम के एक भी पुत्र नहीं था।  ऐसे में परिवार व समाज के लोगों ने पहल करते हुए 15 वर्षीय बड़ी बेटी निशा कालावत को पगड़ी बांधकर रस्म अदायगी की। मृतक श्रीराम कालावत मजदूरी कर परिवार का  भरण-पोषण करते थे।

सीकर. राजस्थान के सीकर जिले के ग्रमीण क्षेत्र में धीरे-धीरे सामाजिक बदलाव की बयार देखने को मिल रही है। इसकी एक बानगी जिले के टोडा गांव में देखने को मिली। बेटा-बेटी एक समान की सोच को सार्थक करने वाली एक तस्वीर देखने को मिली। जहां घर के मुखिया की मौत हो जाने के चलते 10वीं में पढ़ाई करने वाली बेटी के सिर पर पगड़ी बांधी गई। दरअसल, टोडा के श्रीराम कालावत की हाल ही में मौत हो गई थी। सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार तो परिजनों ने कर दिया।

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लेकिन, तीन बेटियों के पिता श्रीराम के एक भी पुत्र नहीं था। ऐसे में परिवार व समाज के लोगों ने पहल करते हुए 15 वर्षीय बड़ी बेटी निशा कालावत को पगड़ी बांधकर रस्म अदायगी की और बेटा-बेटी एक समान की सोच को सार्थक करने का काम किया।

तीन बेटियों के पिता थे श्रीराम
मृतक श्रीराम कालावत तीन बेटियों के पिता थे। मृतक की बेटियां रूंधे गले से बताती है कि पगड़ी बांधने की रस्म में परिवार और समाज ने पूरा सहयोग किया। मृतक श्रीराम के तीन बेटियां निशा, ज्योति व खुशी है।

10वीं में अध्ययनरत बेटी के कंधों पर आई परिवार की जिम्मेदारी
मृतक श्रीराम कालावत मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। ऐसे में परिवार की जिम्मेदारी 10वीं में अध्ययनरत बेटी निशा के कंधों पर आ गई है। मुश्किल की इस घड़ी में बेटी ने कहा कि वह अपने परिवार का खर्च चलाने के लिए जमकर मेहनत करेगी।

क्या होती है पगड़ी रस्म
राजस्थान में पगड़ी को शान माना जाता है। लेकिन इसके साथ-साथ ही पगड़ी एक जिम्मेदारी भी लाती है। दरअसल, अगर घर के मुखिया की मौत हो जाती है परिवार की जिम्मेदारी के लिए घर के बेटे को पगड़ी पहनाई जाती है। इस पगड़ी रस्म में समाज के लोग भी शामिल होते हैं। लेकिन सीकर जिले के टोडा गांव से आई यह तस्वीर, समाज में बदलाव का बहुत बड़ा प्रतीक है। समाज में अब बेटे और बेटियों के बीच किसी तरह की असमानता नहीं है।

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