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अपनी मासूम बच्ची की मौत के बाद भी आधी रात तक मेले में रोते हुए खिलौने बेचती रही यह बेबस और गरीब मां

घर में बेटी की लाश पड़ी थी और मां उसके अंतिम संस्कार के लिए पैसे इकट्ठा करने मेले में खिलौने बेच रही थी। ये खिलौने उसने किसी से पैसे उधार लेकर खरीदे थे। उसका कर्ज भी चुकाना था। भावुक करने वाली यह घटना राजस्थान के पाली की है।

Emotional story about the death of a poor mother and her innocent daughter kpa
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Pali, First Published Mar 18, 2020, 2:18 PM IST
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पाली, राजस्थान. मर्चुरी में मासूम बेटी की लाश पड़ी थी और मां उसके अंतिम संस्कार के लिए पैसे इकट्ठा करने मेले में खिलौने बेच रही थी। ये खिलौने उसने एक व्यापारी से उधार खरीदे थे। उसका कर्ज भी चुकाना था। उस समय इस मां के दिल पर क्या बीत रही होगी..शायद कोई नहीं समझ सकता। भावुक करने वाली यह घटना राजस्थान के पाली की है। जब यह घटना मीडिया में सामने आई...तो लोग हैरान रह गए।


आंखों में आंसू थे और हाथ कांप रहे थे..

यह बेबस मां है जयपुर के लालसोट की रहने वाली सुगना। सुगना पाली में शीतला सप्तमी मेले में खिलौने बेचने आई थी। उसके साथ 7 साल की बड़ी बेटी पिंकी भी थी। मां खिलौने बेच रही थी और बच्ची मेले में मस्ती करने निकल गई। इसी दौरान साइंस पार्क में झूला झूलते हुए बच्ची गिर पड़ी। उसे तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका। अपनी बेटी की मौत से मां टूट-सी गई। लेकिन उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वो बच्ची का अंतिम संस्कार कर सके। वहीं, उसने यह खिलौने अजमेर के किसी व्यापारी से उधार लिए थे। उसे इसके 35 हजार रुपए भी चुकाने थे। हॉस्पिटल प्रबंधन ने बच्ची का शव मर्चुरी में रखवा दिया। इसके बाद बाद रोते हुए भारी मन से फिर मेले में पहुंची। वो रोते हुए आधी रात तक खिलौने बेचते रही। अगले दिन अपनी बच्ची की लाश को गले लगकर मां फूट-फूटकर रो पड़ी। फिर उसका अंतिम संस्कार कराया। हालांकि इस बीच हिंदू सेवा मंडल को घटना की जानकारी लग गई थी, लिहाजा उसने मोक्षधाम में बच्ची के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की।


मां खुद भी बीमार..पति लकवाग्रस्त..
सुगना को फेफड़ों की बीमारी है। वहीं, पति को लकवा है। इसलिए वो घर पर ही रहता है। सुगना ने फिर भी जिंदगी से हार नहीं मानी। वो अपनी दोनों बच्चियों की परवरिश के लिए खिलौने बेचकर रोजी-रोटी का प्रबंध करती थी। इस घटना ने सुगना को तोड़ दिया है। लेकिन उसने सिर्फ इतना कहा कि गरीबों की जिंदगी ऐसी ही होती है।

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