सार

राजस्थान का यह आईपीएस अफसर कई गंभीर आरोपों में संदिग्ध मानते हुए 7 सालों तक जेल में रहा। पर वहां से बाइज्जत बरी हुआ, फिर सरकार से कई खास पदों पर जिम्मेदारी दी गई और वे इन पर खरे उतरे और जब उनको बुधवार को मैडल मिला तो परिवारवाले अपने आंसू रोक नहीं पाए।

जयपुर. पदक लेने वाले यह आईपीएस अफसर है दिनेश एमएन ....। दिनेश एमएन राजस्थान कैडर के आईपीएस अफसर हैं और आज उन्हें राजस्थान पुलिस मुख्यालय में डीजीपी ईमेल लाठर ने पुलिस पदक दिया है।  यह पुलिस पदक केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा उनकी विशिष्ट पहचान ,निडरता और निष्पक्षता के लिए उन्हें सौंपा गया है।  राजस्थान में रहते हुए आईपीएस दिनेश एमएन ने कई खूंखार मोस्ट वांटेड क्रिमिनल पकड़े हैं।  साथ ही कई बड़ी गैंग तबाह और बर्बाद की है।  दिनेश एमएन को पदक लेते हुए देख आज उनके पिता रिटायर्ड तहसीलदार नारायण स्वामी वी और उनकी माता गौरम्मा देवी भी उपस्थित थे। दोनों कर्नाटक से अपने बेटे के इस यादगार पल के लिए राजस्थान आए थे। 

जेल में बिताए 7 साल
दिनेश एमएन वही अफसर है जिन्हें 7 साल  जेल में बिताने पड़े।  उनके ऊपर कई आरोप लगे और गुजरात के सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर में उन्हें संदिग्ध माना गया था।  7 साल जेल में बिताने के बाद उन्हें बाइज्जत और निर्दोष बरी कर दिया गया।  लेकिन इन 7 साल में वे पूरी तरह टूट गए थे।  उसके बाद राजस्थान सरकार ने उन्हें राजस्थान में महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी दी और वह हर जिम्मेदारी में खरे उतरे। 

कन्हैयालाल केस में भी निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
हाल ही में राजस्थान के उदयपुर में कन्हैयालाल टेलर के हत्याकांड के मामले में भी उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। इससे पहले दिनेश एमन को राजस्थान के सबसे खूंखार और मोस्ट वांटेड क्रिमिनल आनंदपाल के एनकाउंटर केस में भी महत्वपूर्ण भूमिका दी गई थी। उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर आनंदपाल गैंग को नष्ट किया था और गैंग की करीब डेढ़ सौ करोड रुपए की प्रॉपर्टी जप्त की थी। 

राज्य के बड़े धोखाधड़ी का भांडाफोड़ में अहम भूमिका
राजस्थान के बड़े घोटालों में से एक पिनकॉन समूह के 800 करोड रुपए की धोखाधड़ी खुलासे में भी दिनेश एमएन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है । 27 साल की सेवा में दिनेश एमएन राजस्थान में एसओजी, एटीएस ,एसीबी समेत कई महत्वपूर्ण पुलिस एजेंसियों में रहे हैं।  वर्तमान में वे एंटी करप्शन ब्यूरो में एडीजी के पद पर तैनात हैं और 1 साल के दौरान उन्होंने कई आईपीएस, आईएएस समेत अन्य सीनियर अफसरों को रिश्वत लेने के मामले में जेल पहुंचाया है।

उनके इन्हीं उत्कृष्ट कार्यो के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा उन्हें स्पेशल पुलिस पदक के लिए चुना गया है। पुलिस पदक का यह कार्यक्रम आज राजस्थान पुलिस मुख्यालय में रखा गया था और डीजीपी ने आईपीएस और आरपीएस समेत राजस्थान पुलिस के 95 पुलिस कार्मिकों को यह अलग-अलग श्रेणी में पदक दिए।

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