राजस्थान में शनिवार के दिन निकली कान्हा जी की शोभायात्रा में लग गए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जिंदाबाद के नारे.... 20 फीट दूरी पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आरती उतार रहे थे। प्रदेश में धार्मिक कार्यक्रम को राजनीतिक रंग दिया गया। 

जयपुर. कोरोना काल जाने के बाद इस साल राजस्थान में पर्व और त्योहारों पर उमंग और खुशी का माहौल है । इस महीने में 15 अगस्त रक्षाबंधन के बाद अब जन्माष्टमी के उल्लास में राजस्थान रंगा हुआ है। लेकिन आज राजधानी जयपुर में जो तस्वीर सामने आई वह शर्मनाक थी। कान्हा जी की शोभा यात्रा की आरती उतारने के बहाने कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं ने जो राजनीति की वह उस जगह पर नहीं करनी थी। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नारे लगा दिए । कार्यकर्ता नारे लगा रहे थे कि हमारी मुख्यमंत्री कैसी हो बाकी कार्यकर्ता कह रहे थे वसुंधरा राजे जैसी हो ,

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राजस्थान का शायद पहला मामला
इस धार्मिक कार्यक्रम को पूरा राजनीति के रंग में रंग दिया गया। संभवत है यह पहला ही मौका है जब कान्हा जी की शोभायात्रा में आरती उतारने के लिए इतने दिग्गज नेताओं की होड़ मची हुई है। यह सारा घटनाक्रम जयपुर के बड़ी चौपड़ पर देखने को मिला। 0हुआ यूं कि जयपुर के बड़ी चौपड़ के नजदीक गोविंद देव जी का मंदिर है। वहीं दूसरी ओर चांदपोल बाजार के एक रास्ते में गोपीनाथ जी का मंदिर है। जन्माष्टमी के समय गोपीनाथ जी के यहां से शोभायात्रा गोविंद देव जी के मंदिर आती है। इस शोभायात्रा का स्वागत करने के लिए पहली बार ही मुख्यमंत्री आए। उन्होंने बड़ी चौपड़ पर शोभा यात्रा का स्वागत किया और आरती की। उससे कुछ ही कदम की दूरी पर हवा महल के नजदीक पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए मंच सजाया गया था। इस मंच पर भारतीय जनता पार्टी के कई दिग्गज नेता मौजूद थे। वसुंधरा राजे भी पहली बार शोभायात्रा का स्वागत करने पहुंची थी। 

शोभा यात्रा के स्वागत में लगे नारे
इस स्वागत कार्यक्रम के बीच में ही इतने नारे लगे कि अचानक माहौल ही बदल गया। जयपुर में पिछले कुछ सालों में इस तरह का यह पहला ही मामला सामने आया है, जब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर वसुंधरा राजे के नारे लगे हो। दोनों पक्षों की ओर से जारी नारेबाजी के दौरान शोभा यात्रा गुजरती रही और उसके बाद गोविंद देव जी के मंदिर में जा कर यह शोभा यात्रा संपन्न हुई।

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