बड़े वाहन के कारण कार मालिक रेड सिग्नल नहीं देख पाया जिसकी वजह से कार रेड सिग्नल पार कर गई। इस गलती पर पुलिस ने पहले कार पर हमला किया फिर कारमालिक को बाहर खींचकर पीटा।

जयपुर. राजधानी में आज दोपहर एक बड़ा घटनाक्रम हुआ । कार में जा रहे एक व्यक्ति उनकी पत्नी और 2 साल की बच्ची की जान उस समय जोखिम में आ गई जब रेड लाइट जंप करने के ऑफेंस में एक पुलिसकर्मी ने कार पर डंडा मार दिया। जिससे कार का शीशा टूट गया और कार में बैठे बच्ची रोने लगी। कार में बैठी महिला भी घबरा गई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस ने कार चालक और उसकी मदद को आए कई लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया। उनको थाने लाकर पीटा भी गया। बाद में जब मीडिया कर्मियों ने इस पूरे मामले के बारे में जानकारी मांगी तो, पुलिस बात को टालते नजर आई। अफसरों का कहना था कि पूरे घटनाक्रम का सीसीटीवी मौजूद है। जिसमें पुलिस से मारपीट करती भीड़ दिखाई दे रही है । लेकिन जब यह वीडियो मांगा गया तो इस वीडियो को अवेलेवल नहीं कराया गया।

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 यह है पूरा मामला
सत्यनारायण सैनी नाम का एक व्यक्ति अपनी पत्नी और 2 साल की बच्ची के साथ रामबाग चौराहे से गुजर रहा था। आगे चल रहे हैवी व्हीकल के कारण उनकी नजर ट्रैफिक लाइट पर नहीं पड़ी और कार रेड लाइट सिंगनल को क्रास कर गई। इस दौरान चौराहे के नजदीक खड़े पुलिसकर्मी अचानक कार के आगे आकर कूद पड़े। कार ड्रायवर ने अचानक से संतुलन खो दिया इसके बाद जैसे ही वह कार को जैसे ही रोकने वाला था उसी वक्त कार पर एक पुलिस वाले ने डंडा मार दिया। जिससे कार का अगला शीशा टूट गया। बाद में कार चालक को कार से खींचकर बाहर निकाला गया, उसे गंदी गालियां दी गई। मौके पर ट्रैफिक पुलिस कर्मियों के साथ ही होमगार्ड के जवान भी मौजूद थे। सभी ने मिलकर सत्यनारायण सैनी से मारपीट की बाद में जब इसकी सूचना पुलिस कंट्रोल रूम में दी गई तो मौके पर गांधीनगर थाने की पीसीआर पहुंची। पीसीआर वाले पुलिसकर्मियों ने भी अपशब्द कहे। 


पुलिस ने खुद की एफ आई आर की, पीड़ित को पक्ष भी नहीं रखने दिया
सत्यनारायण ने अपनी मदद के लिए अपने कुछ परिचितों को मौके पर बुलाया तो उनके साथ भी पुलिसकर्मियों ने हाथापाई की। हालात यह हो गए कि पुलिस अफसरों को दखल देना पड़ा। अंत में सभी मौजूद लोगों को गांधीनगर थाने लाया गया । उन पर शांति भंग करने का आरोप लगाकर केस दर्ज किया गया। इसी आधार पर 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने अपने पक्ष में तुरंत FIR की जबकि पीड़ित पक्ष की ओर से शिकायत तक नहीं ली गई।