एडवोकेट आकाश विश्नोई और लॉ स्टूडेंट अजय मेहरा ने पहाड़ियों में घूमने का प्लान बनाया। दोनों 480 रुपए में जोधपुर से शिमला पहुंचे। इसके बाद शिमला से लिफ्ट लेकर ही किन्नौर, स्पीति समेत अन्य जगह वह लोगों से लिफ्ट मांग कर ही गए।

जोधपुर. राजस्थान के जोधपुर इलाके के रहने वाले दो दोस्तों ने हाल ही में जम्मू कश्मीर, लेह लद्दाख और हिमाचल प्रदेश का टूर किया है। दोनों 28 दिन बाद अपने घरों को लौटे हैं। 28 दिनों में करीब 3000 किलोमीटर का सफर तय कर लिया। लेकिन दोनों के केवल इस पूरी यात्रा में 1900 रुपए ही खर्च हुए हैं। यह कोई चौंकने वाली बात नहीं है। दोनों ने अपना पूरा सफर लोगों से लिफ्ट लेकर किया है। दरअसल, एडवोकेट आकाश विश्नोई और लॉ स्टूडेंट अजय मेहरा ने पहाड़ियों में घूमने का प्लान बनाया। दोनों 480 रुपए में जोधपुर से शिमला पहुंचे। इसके बाद शिमला से लिफ्ट लेकर ही किन्नौर, स्पीति समेत अन्य जगह वह लोगों से लिफ्ट मांग कर ही गए। हालांकि भी एक संयोग रहा कि दोनो को किसी ने लिफ्ट देने से मना नही किया। वापस लौटने के दौरान बडियाल के नजदीक लैंड स्लाइड में दोनों को काफी दिक्कतें हुई। लेकिन उसके बाद दोनों को सेना के जवानों की मदद मिली। जिससे कि उन्होंने 35 किलोमीटर का रास्ता आसानी से पार कर लिया।

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यूट्यूब से वीडियो देखकर की शुरुआत 
आकाश और अजय दोनों को ही घूमने का बेहद शौक है। ऐसे में दोनों ट्रैवलिंग से जुड़े वीडियो भी देखते रहते हैं। जिसमें हिचहाइकिंग के बारे में भी बताया जाता है। ऐसे में दोनों ने इसी तरीके से अपनी यात्रा करने के बारे में सोची और 29 मई को दोनों जोधपुर से निकल पड़े।

शिमला के बाद ट्रैवलिंग में खर्चा नहीं
दोनों दोस्त ट्रेन के जरिए शिमला पहुंच गए। यहां खुद के पैसे पर घूमे फिरे। इसके बाद एक हाईवे पर पहुंचकर दोनों ने अपना हिचहाइकिंग का सफर शुरू कर दिया। कई बार तो लोगों ने लिफ्ट देने के साथ साथ में खाना भी खिलाया। 

दोनों दोस्तों ने बताया कि उन्होंने अपने सफर के दौरान काफी अच्छे लोग मिले। जिन्होंने अपने घर पर भी उन्हें रखा। 28 दिन के इस सफर में केवल उन्हें पांच रात्रि सड़क पर गुजरनी पड़ी। दोनों दोस्तों का कहना है कि कश्मीर में बढ़ रही आतंकी गतिविधियों का असर वहां के आमजन पर है। सभी लोग सहमे हुए हैं। वहां आमजन का कहना था कि केवल सेना के वाहनों से लिफ्ट लेना सेफ रहेगा। ऐसे में दोनों दोस्तों ने वहां सेना के वाहन से ज्यादा लिफ्ट मांगी। वापसी के दौरान जब दोनों दोस्त से जम्मू के रास्ते बडियाल पहुंचे तो वहां एक टनल पर लैंडस्लाइड होने से रास्ता जाम हो चुका था। ऐसे में दोनों दोस्त 24 घंटे तक वहीं अटके रहे। उसके बाद उस सेना की एक टुकड़ी ने उन्हें वैकल्पिक रास्ते से पैदल सफर करवाया। सैनिकों के साथ 35 का सफर करने के बाद दोनों दोस्त जम्मू पहुंचे।

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