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इतिहास बना: राजस्थान के कृष्णा और अवनी को खेल रत्न, दोनों ने पैरालिंपिक में जीता था गोल्ड, जानिए इनके बारे में

राष्ट्रीय खेल अकादमी (National Sports Academy) ने इस साल के खेल रत्न पुरस्कारों (Khel Ratna Award) का ऐलान कर दिया है। इस बार देशभर के 11 खिलाड़ियों को खेल रत्न से सम्मानित किया जाएगा। इनमें राजस्थान (Rajasthan) के दो पैरालिंपिक खिलाड़ी अवनि लेखरा (Avni lekhra) और कृष्णा नागर (Krishna Nagar) भी शामिल है। अवनि ने टोक्यो पैरालिंपिक (Tokyo Paralympics) में शूटिंग में गोल्ड मेडल जीत देश का नाम रोशन किया था। वहीं, कृष्णा ने बैडमिंटन M6 कैटेगरी में गोल्ड मेडल हासिल किया था। दोनों खिलाड़ी राजस्थान के जयपुर (Jaipur) के हैं। 

Rajasthan Krishna Nagar and Avani Lekhara will be given Khel Ratna Award Know about Players
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Jaipur, First Published Oct 28, 2021, 8:16 AM IST
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जयपुर। राजस्थान के इतिहास में पहली बार एक साथ दो पैरालिंपिक खिलाड़ियों को खेल रत्न अवॉर्ड (Khel Ratna Award) से सम्मानित किया जाएगा। खास बात ये है कि दोनों खिलाड़ी जयपुर (Jaipur) के रहने वाले हैं। पैरालिंपिक खिलाड़ी अवनि लेखरा (Avni lekhra) और कृष्णा नागर (Krishna Nagar) ने टोक्यो में देश के लिए गोल्ड जीते थे। अवनि ने टोक्यो पैरालिंपिक में शूटिंग में गोल्ड मेडल जीतकर नाम रोशन किया था तो कृष्णा ने बैडमिंटन M6 कैटेगरी में गोल्ड मेडल हासिल किया था। राष्ट्रीय खेल अकादमी (National Sports Academy) ने इस साल के खेल रत्न पुरस्कार के लिए इन दोनों खिलाड़ियों को भी शामिल किया है। इस घोषणा के बाद लोगों में खुशी देखी जा रही है।

दरअसल, अवनि लेखरा टोक्यो पैरालिंपिक में दो मेडल जीतने वाली देश की पहली खिलाड़ी हैं। वे जयपुर के शास्त्री नगर में रहती हैं। उन्होंने टोक्यो पैरालिंपिक में 10 मीटर एयर राइफल में भारत के लिए पहला गोल्ड जीता था। वहीं, 50 मीटर एयर राइफल महिला प्रतिस्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रचा था। बता दें कि साल 2012 में महाशिवरात्रि के दिन अवनि के साथ एक रोड हादसा हो गया था, जिससे पैरालिसिस हो गया और उन्हें व्हील चेयर का सहारा लेना पड़ा। लेकिन, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और शूटिंग में मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।

अवनि ने साल 2015 में निशानेबाजी शुरू की थी
अवनि ने साल 2015 में जयपुर के जगतपुरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में शूटिंग शुरू की। 2017 में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था। उन्होंने यूएई में हुए विश्वकप में हिस्सा लिया था। साल 2018 में एशियन पैरा गेम्स में भी हिस्सा लिया था। इसके बाद साल 2019 में उन्हें भारत में गोस्पोर्ट्स फाउंडेशन द्वारा मोस्ट प्रॉमिसिंग पैरालंपिक एथलीट नामित किया गया था।

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पहले शूटिंग और तीरंदाजी की, बाद में शूटिंग जारी रखी
8 नवंबर 2001 को जयपुर में जन्मी अवनि को पिता ने खेल में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया। अवनि ने शुरू में शूटिंग और तीरंदाजी दोनों की कोशिश की। इसके बाद अवनि को शूटिंग में ज्यादा मजा आया। इसके बाद उन्होंने इसे ही जारी रखा। भारतीय निशानेबाज अभिनव बिंद्रा की किताब पढ़ने के बाद वह और भी प्रेरित हुईं। बता दें कि अवनि ने राजस्थान विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की है।

बताते हैं कि साल 2012 में अवनि लेखरा अपने पिता प्रवीण लेखरा के साथ जयपुर से धौलपुर जा रही थी। इसी दौरान रास्ते में वह सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए। इस हादसे में अवनी लेखरा और प्रवीण लेखरा दोनों घायल हो गए। प्रवीण लेखरा तो जल्द ही ठीक हो गए, लेकिन अवनी लेखरा की रीड की हड्डी टूट गई और वह जिंदगी भर चलने में असमर्थ हो गई।

अभिनव की बायोग्राफी से मिली प्रेरणा
जिंदगीभर के लिए दिव्यांग होने के बाद अवनि काफी निराश हो गई थी। उन्होंने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था। इस बीच, एक दिन उन्होंने अभिनव बिन्द्रा की बायोग्राफी पढ़ी, इससे उन्हें काफी प्रेरणा मिली। साथ ही निशानेबाजी की तरफ उनकी रूचि भी काफी बढ़ गई।

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कृष्णा को 2 साल की उम्र में लाइलाज बीमारी के बारे में पता चला
कृष्णा नागर के लिए खेल रत्न तक पहुंचना इतना आसान नहीं था। सिर्फ 2 साल की उम्र में कृष्णा के परिजन को उनकी लाइलाज बीमारी का पता चला। इसके बाद कृष्णा की उम्र तो बढ़ रही थी, लेकिन लंबाई नहीं बढ़ रही थी। ऐसे में खुद कृष्णा भी निराश होने लगे। उनकी हाइट 4 फीट 2 इंच पर ही थम गई। परिजन ने कृष्णा का हर वक्त साथ दिया और उन्हें मोटिवेट करते रहे। उसी का नतीजा है कि कृष्णा बैडमिंटन शॉर्ट हाइट कैटेगरी में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीतने वाले खिलाड़ी बने हैं, जिसके बाद उन्हें अब खेल रत्न से सम्मानित किया जाएगा।

2017 से खेलना शुरू किया बैडमिंटन
कृष्णा ने 2017 से बैडमिंटन खेलना शुरू किया। इससे पहले वे सारे खेल खेलते थे। बचपन से ही उनकी खेलों में रुचि रही है। वे सारे खेल गलियों और पार्क में ही खेलते हैं। सवाई मानसिंह स्टेडियम के कोच राघवेंद्र सिंह कहते हैं कि बैडमिंटन खेलने में उसकी लगन उसे बाकी बच्चों से अलग बनाती थी। कृष्णा की उम्र सिर्फ 22 साल हैं। उन्होंने 2020 टोक्यो पैरालंपिक में गोल्ड मैडल अपने नाम किया। नागर 2019 वर्ल्ड चैंपियनशिप में पैरा-बैडमिंटन में सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं। दुबई में दुबई पैरा-बैडमिंटन इंटरनेशनल में पुरुष एकल और युगल में गोल्ड जीतकर नागर ने टोक्यो पैरालंपिक के लिए क्वालिवाई किया था। कृष्णा वर्तमान में लखनऊ में पैरा-बैडमिंटन के नेशनल कोच गौरव खन्ना के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग ले रहे हैं। वे अपनी श्रेणी में नंबर दो खिलाड़ी हैं।

देश में 11 खिलाड़ियों को मिलेगा खेल रत्न
इस बार नीरज चोपड़ा (जेवलिन), आवनी लेखरा (शूटिंग), मिताली राज (क्रिकेट), रवि दहिया (रेस्लिंग), लोवलिना (बॉक्सिंग), सुनील छेत्री (फुटबॉल), पीआर श्रीजेश (हॉकी), प्रमोद भगत (बैडमिंटन), कृष्णा नागर (बैडमिंटन), मनीष नरवाल (शूटिंग) और सुमित अंतिल (जेवलिन) को खेल रत्न से सम्मानित किया जाएगा।

देश में खेल के क्षेत्र में सबसे बड़ा अवॉर्ड
खेल रत्न देश में सबसे बड़ा खेल अवॉर्ड है। पहले यह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी के नाम पर था। हाल ही में मोदी सरकार ने इसका नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवॉर्ड कर दिया है।

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