राजसमंद में दुनियां की सबसे बड़ी भगवान शिव की प्रतिमा का लोकार्पण आज यानि शनिवार के दिन हो गया। इसके बाद अब जानिए आम जनता के लिए यह कब से खोला जाएगा, और कितनी इंट्री फीस देनी होगी। सारे सवालों के जवाब मिलेंगे यहां।

राजसमंद. राजस्थान में स्थित राजसमंद जिले मैं बनी भगवान शिव की सबसे बड़ी प्रतिमा का उद्घाटन आज शाम देश दुनिया में मशहूर कथा वाचक मुरारी बापू और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किया। उद्घाटन के बाद इस प्रतिमा को अब कुछ दिन के बाद जनता के लिए खोल दिया जाएगा। अद्भुत तरीके से बनाई गई इस प्रतिमा को देखने के लिए जनता को कितना शुल्क देना पड़ेगा फिलहाल इस बारे में अभी तक प्रबंधकों की तरफ से कोई जानकारी नहीं आई है। 

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आम नागरिक को इतना, तो विदेशियों को देना होगी ये राशि
भगवान शिव की इस प्रतिमा को अंदर से देखने के लिए शुल्क देना होगा। बताया जा रहा है कि सामान्य जनता को यानी राजस्थान के लोगों को करीब 300 से 500 प्रति व्यक्ति किराया देना होगा। राजस्थान के बाहर के भारतीय लोगों को करीब 700 से 1 हजार तक शुल्क देना पड़ेगा। वही देश के बाहर से आने वाले लोगों को करीब 3 हजार तक प्रतिमा देखने का शुल्क देना होगा। 369 फीट की इस प्रतिमा को देखने के लिए 280 फीट तक लिफ्ट की व्यवस्था है। प्रतिमा के अंदर ही कई बड़े हॉल , संग्रहालय , रेस्टोरेंट और अन्य कंपार्टमेंट बनाए गए हैं ।

इतना सामान लगा बनाने में
3हजार टन स्टील 2.5 क्यूबिक कंक्रीट और अन्य धातुओं से बनी इस मूर्ति का उद्घाटन आज शाम को किया गया है। प्रतिमा को इस तरह से बनाया गया है कि दिन में यहां का वातावरण अलग होगा और रात के समय प्रतिमा की चकाचौंध और लाइटिंग बेहद अद्भुत होगी। यानी दोपहर और रात दोनों समय लगातार मंदिर और प्रतिमा के दर्शन किए जा सकेंगे। 

गुटखे के कारोबारी है प्रतिमा बनवाने वाले पालीवाल
 प्रतिमा बनवाने वाले गुटखा कारोबारी मदन पालीवाल के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कथावाचक मुरारी बापू के सामने कहा कि बापू आप मदन जी से कहिए कि वह गुटखा का कारोबार छोड़ दें, यह देश के लिए और लोगों के लिए उचित नहीं है। उसके बाद बापू ने कहा कि वह इस बारे में बात करेंगे।

 उल्लेखनीय है कि मदन पालीवाल ने इस प्रतिमा को बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए हैं। 52 बीघा पहाड़ी और आसपास के क्षेत्र को कवर करती हुई इस मूर्ति को देखने के लिए दिसंबर से जनता को टिकट देना होगा। साल 2012 में इसकी नीव कथा वाचक मुरारी बापू और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मिल कर रखी थी और आज दोनों ने मिलकर इसका उद्घाटन किया है। 

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