कुछ लोग पुलिस विभाग को बदनाम कर देते हैं। यह मामला भी इसी से जुड़ा है। भेड़-बकरियां चराकर और छोटी-मोटी खेतीबाड़ी करके अपने परिवार का पेट पालने वाला यह शख्स डोडा पोस्त(नशीली चीजें) की तस्करी के आरोप में जेल में बंद है। यह शख्स साइकिल तक चलाना नहीं जानता, उसे पुलिस ने ड्राइवर बता दिया। यह षड्यंत्र तेजाराम को फंसाने के लिए एक कुख्यात बदमाश ने रचा था।

पाली, राजस्थान. जिस शख्स ने कभी गांव के बाहर कदम नहीं रखे, उसे नशीली चीजों का तस्कर बता दिया गया। जिस शख्स ने कभी साइकिल नहीं चलाई, उसे ड्राइवर बता दिया गया। यह कारनामा किया है राजस्थान की पाली पुलिस ने। कुछ लोग पुलिस विभाग को बदनाम कर देते हैं। यह मामला भी इसी से जुड़ा है। भेड़-बकरियां चराकर और छोटी-मोटी खेतीबाड़ी करके अपने परिवार का पेट पालने वाला यह शख्स डोडा पोस्त(नशीली चीजें) की तस्करी के आरोप में जेल में बंद है। यह शख्स साइकिल तक चलाना नहीं जानता, उसे पुलिस ने ड्राइवर बता दिया। यह षड्यंत्र तेजाराम को फंसाने के लिए एक कुख्यात बदमाश ने रचा था।

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बदमाश ने रची साजिश
यह मामला पाली जिले के सुमेरपुर के निकट बांकली गांव के रहने वाले तेजाराम से जुड़ा है। उदयपुर की वल्लभनगर थाना पुलिस ने उसे गाड़ी से डोडा तस्करी करने के इल्जाम में पकड़कर जेल पहुंचा दिया। इसे 6 अगस्त को पकड़ा गया था। तीन दिन बाद जब इसके परिजनों को इसकी जानकारी मिली, तो वे हैरान रह गए। अब यह मामला तूल पकड़ चुका है। बेकसूर चरवाहे को साजिश के तहत फंसाने के खिलाफ देवासी समाज के लोगों के साथ गांववालों ने प्रदर्शन किया। यह मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री के आदेश पर मामला सीआईडी को सौंप दिया गया है।

बताते हैं कि तेजाराम अपने भतीजे की हत्या का मुख्य गवाह है। इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी पाली उप कारागार में बंद है। इसी जेल में उसका दोस्त कुख्यात बदमाश उमेश बेनीवाल भी बंद है। बेनीवाल को पिछले साल डोडा पोस्ता की तस्करी करते सुमेरपुर पुलिस ने पकड़ने का प्रयास किया था। इस पर उसने फायरिंग कर दी थी। बेनीवाली ने अपने दोस्त को छुड़वाने यह साजिश रची। उसने पुलिस को बयान दिया कि डोडा पोस्त की तस्करी के लिए गाड़ी तेजाराम ने उपलब्ध कराई थी। पुलिस ने बदमाश के बयान की ठीक से तस्दीक नहीं की और तेजाराम को पकड़ लिया। इस मामले में सुमेरपुर विधायक जोराराम कुमावत ने कहा कि उन्होंने भी इस मामले की शिकायत सीनियर पुलिस अफसरों से की, लेकिन उन्होंने जांच नहीं कराई। इसके बाद मामला सीएम तक पहुंचा।