ज्वाइंट मिलिट्री एक्सरसाइज के दौरान भारतीय सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल अमिताभ शर्मा ने बताया, इस युद्धअभ्यास में अमेरिका की 2 इनफेंट्री बटालियन, 3 इनफेंट्री रेजिमेंट और 1-2 स्ट्राइकर ब्रिगेड कॉम्बैट टीम हिस्सा ले रही हैं। इसके चलते दोनों देशों की सेना को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।


बीकानेर (राजस्थान). चीन से चल रहे तनाव के बीच भारत और अमेरिका की सेना साझा युद्धभ्यास के लिए राजस्थान के धरती पर पहुंची हैं। जहां पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच सोमवार से सालाना ज्वाइंट मिलिट्री एक्सरसाइज, युद्धाभ्यास की शुरुआत हो रही है। जिसे 'युद्ध अभ्यास-20' नाम दिया गया है। यह युद्धअभ्यास भारत पाकिस्तान सीमा के करीब होगा। 

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यह युद्धअभ्यास 21 फरवरी तक चलेगा
दरअसल, भारत और अमेरिकी सेना के 16वें संयुक्त सैन्य अभ्यास में शिरकत करने बीकानेर पहुंचा है। इस संयुक्त अभ्यास का आयोजन दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग के तहत किया जाता है। बता दें कि इस एक्सरसाइज में अमेरिकी सेना की स्ट्राइकर-ब्रिगेड हिस्सा ले रही है, जिसे घोस्ट ब्रिगेड के नाम से जाना जाता है। यह युद्धअभ्यास 21 फरवरी तक चलेगा। 

परंपरागत व गैर परंपरागत युद्ध पर होगा फोकस
ज्वाइंट मिलिट्री एक्सरसाइज के दौरान भारतीय सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल अमिताभ शर्मा ने बताया, इस युद्धअभ्यास में अमेरिका की 2 इनफेंट्री बटालियन, 3 इनफेंट्री रेजिमेंट और 1-2 स्ट्राइकर ब्रिगेड कॉम्बैट टीम हिस्सा ले रही हैं। इसके चलते दोनों देशों की सेना को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। इस दौरान परंपरागत व गैर परंपरागत युद्ध शैली पर फोकस किया जाएगा। 

दोनों देश के जवान अपनी खासियत और दक्षता को बताएंगे
बता दें कि इस भारत और अमेरिकी सेना के इस युद्धाभ्यास में करीब दोनों ही देशों के 500 से ज्यादा ट्रूप्स 20 से ज्यादा तरीकों से युद्ध की आजमाइ की जाएगी। जहां जवान अपनी-अपनी खासियत और दक्षता को बताएंगे। इसके जरिए भारत चीन व पाकिस्तान के साथ इंडो पेसेफिक क्षेत्र में दोनों देश अपना दबदबा कायम करेगा।

दोनों देशों की सेनाओं ने ऐसे किया स्वागत
दोनों देशों की सेना के सूरतगढ़ पहुंचने पर, भारतीय सेना ने अमेरिकी सेना के दल का स्वागत किया और दोनों देशों के सैनिकों के कमांडरों और सैनिकों ने एक-दूसरे को बधाई दी। वहीं लेफ्टिनेंट कर्नल शर्मा ने कहा कि यह भारत और अमेरिका के बीच सबसे बड़े सैन्य प्रशिक्षण और रक्षा सहयोग प्रयासों में से एक है। उन्होंने बताया कि दोनों देश आतंकवाद के खतरे को समझते हैं और उसका मुकाबला करने में कंधे से कंधा मिलाकर करने के लिए तैयार हैं।