राजस्थान के जयपुर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश में 3 अगस्त से तेज बारिश का पूर्वानुमान जारी किया था और हल्की बारिश की संभावना जताई थी, लेकिन राज्य के सीकर जिलें में मीडियम से तेज बरसात ने वहां के कई इलाकों को जलमग्न कर दिया है।

सीकर. राजस्थान में मौसम विभाग की भविष्यवाणी एक बार फिर फेल नजर आई है। विभाग के तीन अगस्त तक मानसून सुस्त रहने की रिपोर्ट के उलट सीकर जिले में आज यानि सोमवार सुबह से तेज बरसात हो रही है। जो रुक रुककर अब तक तीन बार हो चुकी है। सीकर शहर व आसपास के इलाकों में जमकर हो रही बरसात से नवलगढ़ रोड व बजाज रोड सहित कई इलाके पानी से जलमग्न हो गए हैं। गनीमत से तीनों बरसात के बीच अंतराल में पानी की निकासी से हालात ज्यादा खराब नहीं हुए। पर इसके बावजूद कई जगह पानी भराव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है। 

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हल्की बारिश की थी संभावना
इससे पहले मौसम विज्ञान केंद्र ने सीकर में सुबह कहीं कहीं बारिश का तात्कालिक पूर्वानुमान जारी किया था। जिसमें बारिश हल्की गति से होने की संभावना जताई थी। लेकिन, इसके बावजूद बारिश की गति मध्यम से तेज रही। जो बरसने के चंद मिनटों बाद ही नाले चलने लगे।

तीन अगस्त के बाद तेज बारिश का था अलर्ट
इससे पहले मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश में तीन अगस्त तक मानसून की गतिविधियां कम होने की बात कही थी। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार राजस्थान में मानसूनी गतिविधियों में कमी की वजह मानसून की ट्रफ का उत्तर की तरफ शिफ्ट होना है। रिपोर्ट में बताया कि वर्तमान में मानसून ट्रफ लाइन सामान्य से उत्तर की ओर शिफ्ट हो चुकी है तथा राज्य के अधिकांश भागों में पश्चिमी हवाएं प्रभावी है। पंजाब व आसपास के क्षेत्रों के ऊपर एक परिसंचरण तंत्र भी मौजूद है। इससे बारिश की कमी का दौर आगामी दो दिन बने रहने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार 3 अगस्त से मानसून ट्रफ लाइन के एक बार वापस सामान्य स्थिति की तरफ शिफ्ट होने से राज्य के उत्तरी व पूर्वी भागों में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी। 4 अगस्त को पूर्वी राजस्थान के कोटा संभाग व आसपास के जिलों में कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है।

राजस्थान में 55 फीसदी ज्यादा हुई बारिश
स्काईमेट वेदर रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में 1 जून से 29 जुलाई के बीच अच्छी बारिश दर्ज हुई है। जो औसत से 55 फीसदी ज्यादा है। रिपोर्ट के अनुसार आमतौर पर पूर्वी राजस्थान में पश्चिमी राजस्थान की तुलना में अधिक बारिश होती है। लेकिन, इस बार पश्चिम राजस्थान में 88 फीसदी अतिरिक्त बारिश दर्ज हुई है।

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