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Raksha Bandhan:धरती फटी और भाई-बहन उसमें समा गए, इस मंदिर में 'जीवत है' भाई-बहन का प्यार

भाई-बहन का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन आने वाला है। हम आपको बताने जा रहे हैं दुनिया के इकलौते मंदिर के बारे में जो भाई-बहन के बलिदान की स्मृति में बनी है।

Raksha Bandhan temple of bihar is known for love of brother and sister know this mandir story NTP
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Delhi, First Published Aug 8, 2022, 4:41 PM IST

लाइफस्टाइल डेस्क. भाई-बहन का प्यार बेहद खूबसूरत और पाक होता है। रक्षाबंधन (Raksha bandhan 2022) के दिन बहन जहां अपने भाई की खुशी और लंबी उम्र की प्रार्थना करते हुए उसे राखी बांधती हैं। वहीं, भाई अपनी बहन की रक्षा का वादा करते हैं। बिहार के सीवान में एक ऐसा मंदिर हैं जो भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है। दुनिया का यह इकलौता मंदिर हैं जो भाई-बहन के लिए बनाया गया है। इस मंदिर के बनने के पीछे मुगलकालीन स्टोरी हैं। 

सीवान में  'भैया-बहिनी मंदिर' हैं जहां पर रक्षाबंधन के दिन लोगों की भीड़ उमड़ी हैं। मंदिर में पूजा करने के बाद लोग बरगद के पेड़ पर राखी बांधते हैं। बहनें यहां राखी चढ़ाकर भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और उसकी खुशी के लिए प्रार्थना करती हैं। दारौंदा प्रखंड के भीखाबांध स्थित 'भैया-बहिनी मंदिर' में श्रावण पूर्णिमा और भाद्र शुक्ल पक्ष अनंत चुतर्दशी के दिन मेला लगता है।यहां यूपी झारखंड और पूरे बिहार के लोग पहुंचते हैं। इस मंदिर के पीछे की एक कहानी है।

भाई ने बहन की रक्षा में दे दी जान

भाई-बहन के इस मंदिर के पीछे जो कहानी है वो कुछ इस तरह है। मुगल शासन काल में एक भाई अपनी बहन को उसके ससुराल से रक्षाबंधन के दो दिन पहले विदा करके घर ले जा रहा था। बहन डोली में थी। जब वो भीखाबांध के पास पहुंचे तो मुगल सैनिको ने उन्हें रोक लिया। वो भाई को अलग हटाकर उसकी बहन को डोली से बाहर निकालकर छेड़खानी करने लगे। बहन की रक्षा करते-करते भाई मार गया। इसके बाद बहन ने भगवान को पुकारा। कहा जाता है कि उस वक्त धरती फट गई और  भाई-बहन उसके अंदर समा गए। जिसके बाद कहार भी कूएं में कूदकर जान दे दी थी।

मंदिर में भाई-बहन की पूरी होती है मुरादें

कहा जाता है जिस जगह पर दोनों धरती में समाए थे वहां पर दो बरगद के पेड़ निकले। जो आपस में ऐसे लिपटे नजर आते हैं जैसे एक दूसरे की रक्षा कर रहे हैं। यह बेड़ करीब पांच बीघा में फैला हुआ है। इसमें लोग राखी बांधते हैं। पेड़ के पास ही लोगों ने मंदिर का निर्माण कराया और उसका नाम 'भैया-बहिनी मंदिर रखा गया। कहा जाता है कि यहां भाई-बहन एक दूसरे के लिए जो मांगते हैं वो पूरा होता है।

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