Ganga Dussehra 2026 Date: हर साल ज्येष्ठ मास की गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन देवनंदी गंगा स्वर्ग से उतरकर धरती पर आई थी। इसलिए इस दिन देवी गंगा की विशेष पूजा की जाती है। 

Ganga Dussehra 2026 Kab Hai: गंगा को देवनदी कहा जाता है यानी देवताओं की नदी। हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस बार गंगा दशहरा का पर्व ज्येष्ठ के अधिक मास में मनाया जाएगा, ऐसा दुर्लभ संयोग इसके पहले साल 2018 में बना था। ऐसी मान्यता है कि यही वो तिथि है जिस दिन गंगा स्वर्ग से उतर कर धरती पर आई थी। इसलिए इस तिथि पर गंगा के तटों पर विशेष पूजन आदि किया जाता है। इस दिन गंगा नदी की पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। जानिए इस बार कब है गंगा दशहरा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त आदि की डिटेल…

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कब है गंगा दशहरा 2026?

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 25 मई, सोमवार की सुबह 4 बजकर 30 मिनिट से शुरू होगी, जो 26 मई, मंगलवार की सुबह 05 बजकर 10 मिनिट तक रहेगी। चूंकि ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि का सूर्योदय 25 मई को होगा, इसलिए इसी दिन ये पर्व मनाया जाएगा।

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गंगा दशहरा 2026 के शुभ मुहूर्त

सुबह 05:46 से 07:25 तक
सुबह 09:05 से 10:44 तक
दोपहर 11:57 से 12:50 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 02:03 से 03:42 तक
शाम 05:21 से 07:01 तक

गंगा दशहरा की पूजा विधि

- गंगा दशहरा पर गंगा नदी पर तट पर जाकर पूजा करना चाहिए। अगर ऐसा न कर पाएं तो घर पर भी पूजा कर सकते हैं।
- इसके लिए सबसे पहले सुबह उठकर स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें।
- घर में किसी स्थान की साफ-सफाई करें। शुभ मुहूर्त में यहां लकड़ी के बाजोट पर देवी गंगा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
- देवी की तस्वीर पर फूलों का हार पहनाएं और कुमकुम का तिलक लगाएं। गाय के शुद्ध घी का दीपक भी जलाएं।
- सफेद कपड़े अर्पित करें। इसके बाद चावल, अबीर, गुलाल, रोली, मेहंदी, आदि चीजें एक-एक करके देवी को चढ़ाते रहें।
- अंत में देवी गंगा को भोग लगाएं और विधि-विधान से आरती करें। इस प्रकार पूजा करने से देवी गंगा की कृपा बनी रहती है।

श्री गंगा मैया की आरती लिरिक्स हिंदी में

नमामि गंगे ! तव पाद पंकजम्,
सुरासुरैः वंदित दिव्य रूपम् ।
भक्तिम् मुक्तिं च ददासि नित्यं,
भावानुसारेण सदा नराणाम् ॥
हर हर गंगे, जय माँ गंगे,
हर हर गंगे, जय माँ गंगे ॥
ऊं जय गंगे माता,
श्री जय गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्याता,
मनवांछित फल पाता ॥
चंद्र सी जोत तुम्हारी,
जल निर्मल आता ।
शरण पडें जो तेरी,
सो नर तर जाता ॥
॥ ऊं जय गंगे माता..॥
पुत्र सगर के तारे,
सब जग को ज्ञाता ।
कृपा दृष्टि तुम्हारी,
त्रिभुवन सुख दाता ॥
॥ ऊं जय गंगे माता..॥
एक ही बार जो तेरी,
शारणागति आता ।
यम की त्रास मिटा कर,
परमगति पाता ॥
॥ ऊं जय गंगे माता..॥
आरती मात तुम्हारी,
जो जन नित्य गाता ।
दास वही सहज में,
मुक्त्ति को पाता ॥
॥ ऊं जय गंगे माता..॥
ऊं जय गंगे माता,
श्री जय गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्याता,
मनवांछित फल पाता ॥
ऊं जय गंगे माता,
श्री जय गंगे माता ।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।