Ganga Saptami Vrat Katha In Hindi: हर साल वैशाख मास में गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 23 अप्रैल, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन लोग देवनदी गंगा की पूजा करते हैं और व्रत भी रखते हैं।

Ganga Saptami Story: हिंदू धर्म में गंगा को देवनदी कहा जाता है क्योंकि गंगा धरती पर आने से पहले स्वर्ग में बहती थीं। हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन गंगा नदी के तटों पर भक्त पूजा करते हैं और व्रत रखकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। गंगा सप्तमी का पर्व क्यों मनाते हैं, इससे जुड़ी एक रोचक कथा है जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। आगे पढ़ें ये रोचक कथा…

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किसने पी लिया था गंगा नदी का पूरा जल?

धर्म ग्रंथों के अनुसार, राजा भागीरथ द्वारा प्रसन्न करने पर देव नदी गंगा जब धरती पर आई तो पहले उन्हें भगवान शिव ने अपनी जटाओं में बांध लिया और इसके बाद धरती पर छोड़ा। इस समय भी गंगा का प्रवाह बहुत अधिक था। गंगा तेजी से उस ओर बहने लगी जहां राजा भागीरथ के पूर्वजों के अवशेष थे।

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इस दौरान गंगा के प्रचण्ड वेग से ऋषि जाह्नु का आश्रम नष्ट हो गया। ये देख ऋषि ने क्रोधित होकर गंगा का समप्त जल पी लिया। ये देख राजा भागीरथ सहित सभी देवताओं ने उनसे क्षमा मांगी और देवनदी गंगा को मुक्त करने का निवेदन किया। जब ऋषि जाह्नु ने देखा कि देवनदी गंगा तो जनकल्याण के लिए धरती पर आईं तो उन्होंने अपने कान से गंगा को प्रवाहित कर दिया।
जिस दिन ऋषि जाह्नु ने देवनदी गंगा को अपने कान से मुक्त किया, उस दिन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि थी। तभी से इस तिथि पर हर साल गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जाता है। ऋषि जाह्नु द्वारा पी लेने और इसके बाद मुक्त करने के चलते देवनदी गंगा उनकी पुत्री जाह्नवी कहलाई।
गंगा सप्तमी के दिन गंगा नदी के तटो पर लाखों भक्त आते हैं और पूजा करते हैं। इस दिन गंगा स्नान का विशेष फल मिलता है, ऐसा धर्म ग्रंथों में लिखा है। बहुत से लोग इस दिन व्रत भी करते हैं। व्रत करने वाले लोगों के लिए ये कथा सुनना जरूरी है, तभी उन्हें इस व्रत का पूरा फल मिलता है।


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।