Bhojshala Verdict: मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने देवी सरस्वती का मंदिर माना है। साथ ही कोर्ट ने यहां नमाज पढ़ने से रोक भी लगाई है। कोर्ट ने यह फैसला ASI सर्वे के आधार पर दिया है।

High Court's Verdict on Bhojshala: मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला का विवाद काफी समय से हाई कोर्ट में चल रहा था। 16 मई को कोर्ट ने इस विवाद को सुलझाते हुए अपना फैसला सुनाया। इस एतिहासिक फैसले में कोर्ट ने भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर माना और यहां मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज पढ़ने पर रोक भी लगाई। हाई कोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला एक बार फिर से सुर्खियों में है। आगे जानें क्या है पूरा विवाद और भोजशाला का रोचक इतिहास…

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क्या था पूरा विवाद?

मध्य प्रदेश के धार शहर में एक प्राचीन स्थान है जिसका नाम भोजशाला है। हिंदू इसे देवी सरस्वती का मंदिर मानते हैं तो मुस्लिम इसे कमाल मौला की मस्जिद। विवाद को सुलझाने तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने साल 2003 में शुक्रवार को यहां मुस्लिम समाज को नमाज पढ़ने की इजाजत दी थी। जब विवाद बढ़ने लगा तो हिंदू और मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट में अपनी बात रखी। कोर्ट के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इस स्थान का मुआयना कर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी। उसी के आधार पर कोर्ट ने भोजशाला को देवी सरस्वती का मंदिर माना।

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कितनी पुरानी है भोजशाला, किसने बनवाई थी।

इतिहासकारों की मानें तो भोजशाला का संबंध राजा भोज से है जो उज्जैन के राजा थे। बाद में इन्होंने धार को अपनी राजधानी बनाया। भोज का अर्थ राजा भोज से है और शाला यानी गुरुकुल। कहते हैं कि राजा भोज ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 11 शताब्दी में धार में इस भोजशाला का निर्माण करवाया था।

भोजशाला कैसे बनी कमाल मौला मस्जिद?

मुगलों के भारत के आने के बाद अनेक स्थानों पर मुस्लिम शासक हो गए। 14वीं शताब्दी में मालवा पर भी मुस्लिम शासकों का कब्जा हो गया। उसी समय मुस्लिम शासकों की नजर भोजशाला पर पड़ी। पहले तो उन्होंने इसे नष्ट करने का प्रयास किया और बाद में इसे कमाल मौला मस्जिद का नाम दे दिया। लंबे समय तक भोजशाला पर मुस्लिमों का अधिकार रहा।

कहां है देवी सरस्वती की मूर्ति?

कहते हैं कि भोजशाला में देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापित थी, जिसे अंग्रेज शासक लूटकर अपने साथ ले गए। यह ऐतिहासिक प्रतिमा वर्तमान में लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय में रखी है। देवी सरस्वती की ये प्रतिमा 4-5 फीट ऊंची है और संगमरमर से बनी है।