Karwa Chauth Vrat Mantra: करवा चौथ पर चंद्रमा को अर्घ्य देते समय कौन से मंत्र पढ़ें? जानें चंद्रदेव की स्तुति, व्रत खोलने के मंत्र, संस्कृत श्लोक और उनका हिंदी अर्थ।

करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। सुबह सरगी खाने के बाद शुरू होने वाला यह व्रत शाम को चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद पूरा किया जाता है। मान्यता है कि चंद्रदेव को अर्घ्य देने और विधि-विधान से पूजा करने के बाद व्रत खोलना शुभ होता है। व्रत खोलने के दौरान श्लोक पढ़कर इस पल को और भी खास बनाया जा सकता है।

चंद्रमा को अर्घ्य देते समय पढ़ें मंत्र

ॐ चन्द्राय नमः॥

  • अर्थ: भगवान चंद्रदेव को मेरा नमन है।
  • कैसे करें जाप: चंद्रमा के दर्शन करने के बाद हाथ जोड़ें और इस मंत्र का जाप करते हुए जल अर्पित करें। इसके बाद अपने पति के अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करें।

चंद्रदेव की स्तुति का श्लोक

  • दधिशङ्खतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्।
  • नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम्॥

अर्थ: दही, शंख और बर्फ के समान उज्ज्वल चंद्रदेव को प्रणाम है, जो भगवान शिव के मस्तक के आभूषण हैं।

कैसे पढ़ें: चंद्रमा के दर्शन करने के बाद इस श्लोक का पाठ करें। इसके बाद अर्घ्य अर्पित करके अपनी मनोकामना व्यक्त कर सकती हैं।

चंद्रदेव का बीज मंत्र

अगर आप करवा चौथ की पूजा में चंद्रदेव का बीज मंत्र पढ़ना चाहती हैं, तो इस मंत्र का जाप कर सकती हैं।

ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः॥

  • अर्थ: यह चंद्रदेव को समर्पित पारंपरिक बीज मंत्र है।
  • कैसे पढ़ें: पूजा के दौरान अपनी श्रद्धा के अनुसार इस मंत्र का जाप करें। यदि आपको लंबा मंत्र याद नहीं रहता, तो 'ॐ चन्द्राय नमः' का जाप भी कर सकती हैं।

वैवाहिक जीवन में प्रेम बनाए रखने के लिए श्लोक

करवा चौथ पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम और विश्वास का प्रतीक भी माना जाता है। इस मौके पर आप अपने दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए यह मौलिक संस्कृत प्रार्थना पढ़ सकती हैं।

  • प्रेमः सदा गृहे तिष्ठतु,
  • विश्वासः हृदये वर्धताम्।
  • सौख्यं शान्तिश्च नित्यं,
  • दम्पत्यजीवने वसताम्॥

अर्थ: घर में सदा प्रेम बना रहे, हृदय में विश्वास बढ़े और दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहे।

कब पढ़ें: चंद्रमा के दर्शन के बाद या पूजा पूरी करते समय इस प्रार्थना का पाठ कर सकती हैं।

व्रत पूरा होने पर पढ़ें यह श्लोक

दिनभर व्रत रखने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देते समय आप अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए यह मौलिक संस्कृत प्रार्थना पढ़ सकती हैं।

  • श्रद्धया कृतमेतद्व्रतं,
  • मम भावः समर्पितः।
  • सुखं शान्तिं च मे देहि,
  • चन्द्रदेव नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: हे चंद्रदेव, श्रद्धा से किए गए इस व्रत में मेरी भावनाएं समर्पित हैं। मुझे सुख और शांति प्रदान करें।

कब पढ़ें: अर्घ्य देने के बाद और व्रत खोलने से पहले इस प्रार्थना का पाठ करें।

चंद्रमा के शीतल प्रकाश के लिए श्लोक

चंद्रमा की शीतल रोशनी को शांति और सुकून से जोड़कर देखा जाता है। करवा चौथ की रात आप यह मौलिक प्रार्थना पढ़कर अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम और शांति की कामना कर सकती हैं।

  • शीतांशो कृपया नित्यं,
  • जीवने मम शान्तिदः।
  • स्नेहदीपः प्रज्वलितः,
  • दम्पत्यं सुखदं भवेत्॥

अर्थ: हे शीतल किरणों वाले चंद्रदेव, हमारे जीवन में शांति बनी रहे और वैवाहिक रिश्ते में प्रेम का दीपक हमेशा जलता रहे।

कब पढ़ें: चंद्रमा को देखकर मन ही मन प्रार्थना करते समय इसका पाठ करें।

पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास के लिए प्रार्थना

अगर आप करवा चौथ पर अपने रिश्ते में हमेशा प्रेम और विश्वास बनाए रखने की कामना करना चाहती हैं, तो इन पंक्तियों को पढ़ सकती हैं।

  • साथ हमारा बना रहे,
  • विश्वास कभी कम न हो।
  • सुख-दुख में हम साथ रहें,
  • प्रेम का बंधन कमजोर न हो।

अर्थ: पति-पत्नी का रिश्ता प्रेम, विश्वास और साथ से मजबूत बना रहे।

कब पढ़ें: छलनी से चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखने के बाद मन से यह प्रार्थना करें।

चंद्रदेव को धन्यवाद देने के लिए श्लोक

करवा चौथ की पूजा के दौरान चंद्रदेव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए आप यह मौलिक संस्कृत प्रार्थना पढ़ सकती हैं।

  • निशायाः शोभनं रूपं,
  • त्वया देव विराजते।
  • मम प्रार्थनां गृहाण,
  • सौख्यं जीवनमर्पय॥

अर्थ: हे देव, आपके कारण रात की शोभा बढ़ती है। मेरी प्रार्थना स्वीकार करें और जीवन में सुख प्रदान करें।

कब पढ़ें: चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने के बाद इसे पढ़ सकती हैं।

दांपत्य जीवन की मंगलकामना के लिए श्लोक

करवा चौथ पर अपने वैवाहिक जीवन में सद्भाव और सुख बनाए रखने की कामना के लिए यह मौलिक संस्कृत रचना पढ़ सकती हैं।

  • मङ्गलं दाम्पत्यजीवनं,
  • मङ्गलं प्रेमबन्धनम्।
  • सौहार्दं च सदैवास्तु,
  • गृहे गृहे सुखं भवेत्॥

अर्थ: दांपत्य जीवन और प्रेम का बंधन मंगलमय रहे। रिश्तों में सद्भाव बना रहे और घर में सुख आए।

कब पढ़ें: चंद्रमा की पूजा के समापन पर इस प्रार्थना का पाठ करें।

Disclaimer

इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।