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हर देवता को प्रसन्न करने के लिए बनाया गया है अलग गायत्री मंत्र, शुभ फल पाने के लिए करें इनका जाप

हिंदू धर्म में गायत्री मंत्र का विशेष महत्व है। देवी गायत्री को वेदों की माता भी कहा जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, मूल गायत्री मंत्र तो 1 ही है, लेकिन मनोकामना पूर्ति और देवताओं को प्रसन्न करने के लिए विद्वानों ने अलग-अलग गायत्री मंत्रों की रचना भी की है।

Know the importance and type of Gayatri Mantra
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Ujjain, First Published Nov 13, 2019, 9:18 AM IST
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उज्जैन. गायत्री मंत्र से इन देवताओं की पूजा की जाए तो बहुत ही जल्दी शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। जिस देवता को प्रसन्न करना हो, उससे संबंधित गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। ये मंत्र इस प्रकार हैं...

1. विष्णु-गायत्री मंत्र
ऊँ नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात।।

2. लक्ष्मी-गायत्री मंत्र
ऊँ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे, विष्णु पत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ।।

3. शिव-गायत्री मंत्र
ऊँ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।।

4. शनि-गायत्री मंत्र
ऊँ भगभवाय विद्महे, मृत्युरूपाय धीमहि। तन्नो सौरी: प्रचोदयात।।

5. गणेश-गायत्री मंत्र
ऊँ एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्ती प्रचोदयात्।।

6. श्रीकृष्ण-गायत्री मंत्र
ऊँ देवकीनन्दनाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि। तन्नो कृष्ण: प्रचोदयात्।।

7. सरस्वती गायत्री मंत्र
ऊँ सरस्वत्यै विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्।।

8. दुर्गा-गायत्री मंत्र
ऊँ गिरिजायै विद्महे शिवप्रियायै धीमहि। तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्।

9. हनुमान-गायत्री मंत्र
ऊँ आंजनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो मारुति: प्रचोदयात्।।

10. सूर्य-गायत्री मंत्र
ऊँ आदित्याय विद्महे, सहस्त्रकिरणाय धीमहि। तन्नो सूर्य: प्रचोदयात्।।

11. तुलसी-गायत्री मंत्र
ऊँ श्रीतुलस्यै विद्महे विष्णुप्रियायै धीमहि। तन्नो वृन्दा प्रचोदयात्।

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