Mahashivratri Ki Kahani: शिव भक्तों का सबसे बड़ा पर्व है महाशिवरात्रि। इस दिन पूरे देश के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। महाशिवरात्रि क्यों मनाते हैं? इसके पीछे कईं कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं। जानें इनमें से सबसे सही कौन-सी है?

maha shivratri kyu manayi jati hai: हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 15 फरवरी, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन हर कोई महादेव को प्रसन्न करने के लिए व्रत, पूजा, दान आदि उपाय करेगा। महाशिवरात्रि क्यों मनाते हैं? इसके पीछे एक नहीं बल्कि कईं कथाएं प्रचलित हैं। इनमें से कुछ कथाएं धर्म ग्रंथों से प्रेरित हैं तो कुछ किवदंतियां। आगे जानिए महाशिवरात्रि से जुड़ी कुछ ऐसी ही कथाएं…

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क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि?

कुछ स्थानों पर महाशिवरात्रि पर्व शिव-पार्वती के विवाह के रूप में मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर ही शिव-पार्वती का विवाह हुआ था। हालांकि शिव पुराण आदि ग्रंथ में इस तिथि पर शिव-पार्वती के विवाह का वर्णन नहीं मिलता। ये एक मान्यता है जो काफी समय से चली आ रही है।

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महाशिवरात्रि पर क्या हुआ था?

महाशिवरात्रि से जुड़ी एक कथा ये भी है फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि पर भगवान शिव 12 ज्योतिर्लिंगों के रूप में प्रकट हुए। ये 12 ज्योतिर्लिंग देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थापित हैं, जिन्हें महादेव के सबसे बड़े मंदिरों के रूप में मान्यता प्राप्त है। हालांकि इस कथा का भी धर्म ग्रंथों में कोई प्रमाण नहीं है।

महाशिवरात्रि मनाने का क्या कारण है?

महाशिवरात्रि मनाने की सबसे सही वजह शिवपुराण में ही बताई गई है। उसके अनुसार, एक बार ब्रह्मा और विष्णु स्वयं को श्रेष्ठ मानने लगे। इस बात पर दोनों में विवाद छिड़ गया। तभी वहां एक विशाल ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ और भविष्यवाणी हुई कि ‘जो भी इस ज्योतिर्लिंग के सिरे को खोज लेगा, वही श्रेष्ठ होगा। ब्रह्मा और विष्णु अलग-अलग इस ज्योतिर्लिंग के सिरे की खोज में लग गए लेकिन दोनों ही इसमें असफल रहे। लेकिन ब्रह्मदेव ने स्वयं को श्रेष्ठ बताने के लिए झूठ बोल दिया कि उन्होंने ज्योतिर्लिंग का सिरा खोज लिया है। तभी वहां महादेव प्रकट हुए और उन्होंने कहा कि ‘ये ज्योतिर्लिंग मेरा ही स्वरूप है। ब्रह्मदेव के झूठ बोलने पर महादेव ने उनकी पूजा न होने का श्राप दिया और विष्णु को श्रेष्ठ देव घोषित किया। पहली बार ज्योतिर्लिंग स्वरूप में प्रकट होने के कारण ही महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है।