Mahesh Navmi 2026 Date: महेश नवमी माहेश्वर समाज द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है। मान्यता है कि इसी तिथि पर माहेश्वरी समाज की उत्पत्ति हुई थी।

Mahesh Navmi Kab Hai: हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर महेश नवमी का पर्व मनाया जाता है, इसे माहेश्वरी जयंती के नाम से भी जाना जाता है। वैसे तो ये सभी सभी समाजों के लोग मनाते हैं लेकिन माहेश्वर समाज में इसे विशेष रूप से मनाया जाता है। इस पर्व पर भगवान शिव की पूजा की जाती है। आगे जानिए साल 2026 में कब है महेश नवमी, इसकी पूजा विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त आदि की डिटेल…

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कब है महेश नवमी 2026?

पंचांग के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 22 जून, सोमवार की दोपहर 03 बजकर 40 मिनिट से शुरू होगी, जो 23 जून, मंगलवार की शाम 04 बजकर 39 मिनिट तक रहेगी। चूंकि ज्येष्ठ शुक्ल नवमी तिथि का सूर्योदय 23 जून को होगा, इसलिए इसी दिन महेश नवमी का पर्व मनाया जाएगा।

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महेश नवमी 2026 शुभ मुहूर्त

सुबह 09:07 से 10:48 तक
सुबह 10:48 से दोपहर 12:29 तक
दोपहर 12:02 से 12:55 तक (अभिजीत मुहूर्त)
दोपहर 12:29 से 02:09 तक
दोपहर 03:50 से 05:31 तक

महेश नवमी पूजा विधि-मंत्र

- महेश नवमी की सुबह यानी 23 जून की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें और ये मंत्र बोलें-
मम शिवप्रसाद प्राप्ति कामनया महेशनवमी-निमित्तं शिवपूजनं करिष्ये
- दिन भर व्रत के नियमों का पालन करें। किसी की बुराई न करें। बुरे विचार मन में न लाएं। मन में भगवान का स्मरण करते रहें।
- पूजा से पहले पूरी सामग्री एक स्थान पर लाकर रख लें। शुभ मुहूर्त में शिव-पार्वती की प्रतिम या चित्र स्थापित कर पूजा शुरू करें।
- महादेव और माता पार्वती को तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं। हाथ जोड़कर प्रणाम करें।
- भगवान शिव को सफेद और देवी पार्वती को लाल वस्त्र अर्पित करें। अबीर, गुलाल, जनेऊ, सुपारी, बिल्वपत्र आदि चीजें अर्पित करें।
- पूजा करते समय मन ही मन में ऊं महेश्वराय नम: मंत्र भी बोलते रहें। इसके बाद ये मंत्र बोलकर भगवान शिव से प्रार्थना करें-
जय नाथ कृपासिन्धोजय भक्तार्तिभंजन।
जय दुस्तरसंसार-सागरोत्तारणप्रभो॥
प्रसीदमें महाभाग संसारात्र्तस्यखिद्यत:।
सर्वपापक्षयंकृत्वारक्ष मां परमेश्वर॥
- भगवान को भोग लगाएं और आरती करें। इस प्रकार महेश नवमी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।

शिवजी की आरती (Shivji Aarti Lyrics in Hindi)

जय शिव ओंकारा ऊं जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥
॥ ऊं जय शिव ओंकारा ॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥
॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥
॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥
अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी।
चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥
॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥
॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता ।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥
॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥
॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥
काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी ।
नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥
॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥
त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे ।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥
॥ ऊं जय शिव ओंकारा॥


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।