Famous Shiv Mandir In India: हमारे देश में महादेव के अनेक प्राचीन मंदिर हैं। इनमें से कुछ मंदिरों से कोई न कोई मान्यता और परंपरा जुड़ी है जो इन्हें और भी खास बनाती हैं। ऐसा ही एक मंदिर उत्तर प्रदेश में हैं जहां भक्त शिवजी को झाड़ू चढ़ाते हैं।

2026 Maha Shivaratri Date: आपने भक्तों को भगवान शिव को भोग, प्रसाद, फूल आदि चीजें चढ़ाते हुए जरूर देखा होगा लेकिन किसी किसी भक्त को झाड़ू चढ़ाते हुए नहीं देखा होगा। लेकिन उत्तर प्रदेश में एक ऐसा प्राचीन शिव मंदिर हैं जहां भक्त महादेव को झाड़ू चढ़ाते हैं। ये परंपरा काफी पुरानी है। इसे पातालेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। इससे जुड़ी एक रोचक कथा भी प्रचलित है। दूर-दूर से भक्त यहां आकर महादेव को झाड़ू चढ़ाते हैं। महाशिवरात्रि (15 फरवरी) के मौके पर जानिए कहां है ये मंदिर और इससे जुड़ी रोचक बातें…

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कहां है पातालेश्वर महादेव मंदिर?

उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद जिले के बहजोई गांव में एक प्राचीन शिव मंदिर हैं, जिसे पातालेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की परंपरा काफी खास है क्योंकि यहां भक्त महादेव को मुख्य रूप से झाड़ू चढ़ाते हैं। सुनने में ये बात थोड़ी अजीब लगे लेकिन ये सच है। सावन और महाशिवरात्रि के मौके पर तो यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है।

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यहां दर्शन-पूजा से दूर होते हैं त्वचा के रोग

पातालेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी एक खास मान्यता ये है कि यहां झाड़ू चढ़ाने और दर्शन-पूजन करने से त्वचा के रोग दूर होते हैं। अनेक भक्त यहां इसी आशा से आते हैं को उनके त्वचा रोग ठीक हो जाएं और वे भी सामान्य लोगों की तरह जीवन जी सके। ये मंदिर लगभग 200 साल पुराना बताया जाता है। खास बात ये है कि इस मंदिर में शिवलिंग के अलावा अन्य किसी देवी-देवता की कोई प्रतिमा आदि नहीं है।

क्या है पातालेश्वर मंदिर से जुड़ी रोचक कथा?

इस मंदिर से जुड़ी एक रोचक कथा भी है, उसके अनुसार, करीब 200 साल पहले पास के किसी गांव में एक धनवान व्यापारी रहता था। उसे त्वचा से संबंधित भयानक रोग था। एक बार जब वह अपने उपचार के लिए वैद्य के पास जा रहा था तो उसे रास्ते में प्यास लगी। पास ही में उसे एक आश्रम दिखा। जैसे ही व्यापारी आश्रम में जाने लगा उसका पैर एक झाड़ू से टकरा गया। उस झाड़ू के स्पर्श ही उस व्यापारी का रोग ठीक हो गया। व्यापारी ने इसे भगवान का चमत्कार माना और वहां एक भव्य शिव मंदिर का निर्माण करवा दिया। बाद में ये मंदिर पातालेश्वर महादेव के नाम से जाना जाने लगा।


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