Vinayaka Chaturthi December 2023 Date: साल 2023 के अंतिम महीने दिसंबर में भगवान श्रीगणेश को प्रसन्न करने का खास मौका आ रहा है। ये मौका है विनायकी चतुर्थी व्रत का। ये व्रत करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। 

Kab Hai Vinayaka Chaturthi December 2023: भगवान श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए महीने में कईं व्रत किए जाते हैं, विनायकी चतुर्थी भी इनमें से एक है। ये व्रत हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर किया जाता है। साल 2023 के अंतिम महीने दिसंबर में अगहन मास की विनायकी चतुर्थी का व्रत किया जाएगा। आगे जानिए कब किया जाएगा ये व्रत, इसकी पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, कथा सहित पूरी डिटेल…

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कब करें विनायकी चतुर्थी व्रत? (Vinayaka Chaturthi December 2023 Kab hai)
पंचांग के अनुसार, अगहन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 15 दिसंबर, शुक्रवार की रात 10:30 से शुरू होकर 16 दिसंबर, शनिवार की रात 08:00 तक रहेगी। चूंकि 16 दिसंबर को चतुर्थी तिथि दिन भर रहेगी, इसलिए ये व्रत इसी दिन किया जाएगा। शनिवार को सर्वार्थसिद्धि, सुस्थिर और वर्धमान नाम के 3 शुभ योग होने से ये व्रत और भी खास हो गया है।

ये है पूजा का शुभ मुहूर्त (Vinayaka Chaturthi December 2023 Shubh Muhurat)
16 दिसंबर, शनिवार को स्नान आदि करने के बाद भगवान श्रीगणेश की पूजा करें। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:15 से दोपहर 01:19 के बीच तक रहेगा। शाम को एक बार पुन: श्रीगणेश की पूजा करें और चंद्र उदय होने पर अर्घ्य देकर व्रत पूर्ण किया जाएगा।

इस विधि से करें विनायकी चतुर्थी व्रत-पूजा (Vinayaki Chaturthi December 2023 Puja Vidhi)
- 16 दिसंबर, शनिवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और इसके बाद व्रत और पूजा का विधि-विधान से संकल्प लें।
- ऊपर बताए गए शुभ मुहूर्त में भगवान श्रीगणेश की पूजा करें। सबसे पहले शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
- इसके बाद श्रीगणेश को माला पहनाएं और तिलक लगाएं। पूजा के दौरान ऊं गं गणेशाय नम: का जाप करते रहें।
- एक के बाद एक दूर्वा, अबीर, गुलाल, चावल रोली, हल्दी आदि चढ़ाते रहें। अंत में भोग लगाएं और आरती करें।
- चंद्रमा उदय होने पर जल से अर्ध्य दें और फिर स्वयं भोजन करें। इस तरह व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

भगवान श्रीगणेश की आरती (Lord Ganesha Aarti)
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥


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