Varalakshmi Vrat Puja Vidhi: दीवाली के दिन जिस तरह से भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा होती है, वैसे ही वरलक्ष्मी व्रत की पूजा होती है। जानिए क्या है पूजा विधि और शुभ मुहूर्त।

Varalakshmi Vrat Timing: हिंदू धर्म में कई सारे व्रत ऐसे होते हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को पता होता है। वर लक्ष्मी व्रत भी उन्हीं में से एक है। इसे विवाहित महिलाएं ही कर सकती हैं। वरलक्ष्मी मां को माता लक्ष्मी का ही अवतार बताया है। दीपावली में जिस तरह से पूजा की जाती है, वैसे ही वरलक्ष्मी व्रत को किया जाता है। इस बार वरलक्ष्मी व्रत 8 अगस्त के दिन पड़ रहा है। इस व्रत को करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। साथ ही आपसी लोगों के बीच प्रेम बना रहता है, जिन लोगों के संतान नहीं है, वो भी ये व्रत रख सकते हैं। आइए जानते हैं क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व।

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सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। दोरक-वायन को अर्पित किया जाता है। शादीशुदा महिलाएं एक दूसरो को देवी के प्रतिनिधि के तौर पर सम्मानित करने का काम करती है। नए वस्त्र, धन, मिठाई और मसाले एक-दूसरे को आदान-प्रदान करती है। बहुत कम लोगों को ये पता है कि सावन का आखिरी शुक्रवार वरलक्ष्मी व्रत के नाम से जाना जाता है। 

जानिए क्या है वरलक्ष्मी व्रत का शुभ मुहूर्त-

- सिंह लग्न पूजा का मुहूर्त सुबह- 6:29 से लेकर 8:46 तक

- वृश्चिक लग्न पूजाका मुहूर्त दोपहर - दोपहर 01:22 से दोपहर 03:41

- कुम्भ लग्न पूजा का मुहूर्त शाम - दोपहर 07:27 से दोपहर 08:54

- वृषभ लग्न पूजा का मुहूर्त मध्यरात्रि 11:55 से सुबह 01:50 AM

स्थिर लग्न का है सबसे शानदार मुहूर्त

देवी लक्ष्मी की पूजा करने का सबसे सही समय स्थिर लग्न का माना जाता है। क्योंकि इस दौरान पूजा करने से समृद्धि हासिल होती है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश में विवाहित महिलाएं इस व्रत को विधि पूर्वक करती हैं।

कैसे करें वरलक्ष्मी व्रत

  • वरलक्ष्मी व्रत के दिन साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
  • एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और माता लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
  • चौकी की दाएं तरफ चावल का ढेरा करें और उसके ऊपर एक कलश की स्थापना करें।
  • कलश को चारों ओऱ चंदन लगाने के साथ कलावा बांधें।
  • दीपक जलाकर माता लक्ष्मी और गणेश जी के सामने व्रत का संकल्प लें।
  • अब दोनों देवी-देवताओं की पूजा करें।
  • उन्हें हल्दी, कुमकुम और सिंदूर लगाने के बाद फूल, माला और दूर्वा आदि अर्पित करें।
  • नैवेद्य अर्पित करते हुए आप षोडशोपचार पूजन कर लें।
  •  मां लक्ष्मी को फिर सोलह श्रृंगार अर्पित करें।
  • गणेश जी-लक्ष्मी जी को भोग और जल अर्पित करें।
  • दीपक और धूप जलाएं। फिर वरलक्ष्मी कथा का पाठ करने के साथ-साथ गणेश चालीसा, लक्ष्मी चालीसा, गणेश-लक्ष्मी का मंत्र जाप करें।
  • पूजा के आखिर में आरती करें और अपनी गलती के लिए माफी मांगे।