Shattila Ekadashi Vrat Katha: इस बार षटतिला एकादशी का व्रत 14 जनवरी, बुधवार को किया जाएगा। इस व्रत से जुड़ी एक कथा भी है, जिसे व्रती (व्रत करने वाला) को जरूर सुनना चाहिए। तभी उसे इस व्रत का पूरा फल मिलता है।
Shattila Ekadashi Vrat Katha In Hindi: माघ मास के कृष्ण पक्ष एकादशी को षटतिला एकादशी कहते हैं। इस व्रत में तिल का उपयोग 6 कामों में करने का विधान है, इसलिए इसका नाम षटतिला रखा गया है। इस व्रत का महत्व और कथा स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताई थी। इस बार ये व्रत 14 जनवरी को किया जाएगा। इस व्रत से जुड़ी एक कथा भी है जो व्रती (व्रत करना वाला) को जरूर सुनना चाहिए, तभी उसे व्रत का पूरा फल मिलता है। आगे पढ़िए षटतिला एकादशी की रोचक कथा…
षटतिला एकादशी की कथा (Shattila Ekadashi Katha)
किसी समय एक नगर में एक ब्राह्मण स्त्री रहती थी। वह धर्म पूर्वक रहती और समय-समय पर आने वाले सभी व्रत-उपवास करती थी। व्रत-उपवास करने से उसका शरीर बहुत दुबला हो गया था। लेकिन उसने कभी अन्न आदि का दान नहीं किया था। वो सोचती थी कि उपवास आदि से ही उसे वैकुण्ठ लोक की प्राप्ति हो जाएगी।
एक दिन उस ब्राह्मण स्त्री के घर एक भिक्षुक अनाज की इच्छा से आया। लेकिन ब्राह्मण स्त्री ने उसे अनाज के स्थान पर मिट्टी के ढेले दे दिए। मृत्यु के बाद जब वह स्वर्ग में गई तो उसे वहां आम के पेड़ के नीचे एक सुंदर घर मिला लेकिन वह बिल्कुल खाली थी। घर में खाने को भी कुछ नहीं था, ये देख उसने भगवान से इसका कारण पूछा।
तब भगवान ने कहा कि ‘तुमने कभी किसी को अन्न का दान नहीं किया इसलिए तुम्हारे घर में खाने की कोई भी वस्तु नहीं है।’ ब्राह्मण स्त्री को अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ। ये देख भगवान ने उससे कहा ‘'तुम अपने घर जाओ और जब देव-स्त्रियां तुम्हें देखने आयें तो तुम उनसे षटतिला एकादशी व्रत का महत्व और विधान पूछ लेना।’
ब्राह्मण स्त्री ने ऐसा ही किया और देव स्त्रियों से षटतिला एकादशी का विधान और महत्व जान लिया। बाद में जब षटतिला एकादशी आई तो ब्राह्मणी ने देव स्त्रियों द्वारा बताई गई विधि से वो व्रत किया। ऐसा करने से ब्राह्मणी का शरीर निरोगी हो गया। उसका घर अनाज व अन्य चीजों से भर गया साथ ही उसके सभी पाप भी नष्ट हो गए।
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