Sita Navmi 2026: वैशाख मास में हर साल सीता नवमी का पर्व मनाया जाता है। इसे जानकी जयंती के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसी महीने में देवी सीता धरती से प्रकट हुई थीं। इस दिन देवी सीता की विशेष पूजा की जाती है।
Sita Navmi 2026: वैसाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि बहुत ही खास होती है क्योंकि इस दिन सीता नवमी का पर्व मनाया जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार त्रेतायुग में इसी तिथि पर देवी लक्ष्मी ने जनक पुत्री सीता के रूप में अवतार लिया था। इसलिए हर साल इस तिथि पर देवी सीता की विशेष पूजा करने की परंपरा है। इस दिन सीता मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। आगे जानिए साल 2026 में कब है सीता नवमी और पूजा विधि, शुभ मुहूर्त आदि की डिटेल…
ये भी पढ़ें-
Budhwa Mangal 2026: क्या है बड़ा मंगल? जानें रोचक कथा, महत्व और डेट्स
कब है सीता नवमी 2026?
पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 24 अप्रैल, शुक्रवार की शाम 07 बजकर 22 मिनिट से शुरू होगी, जो 25 अप्रैल, शनिवार की शाम 06 बजकर 28 मिनिट तक रहेगा। चूंकि नवमी तिथि का सूर्योदय 25 अप्रैल को होगा, इसलिए इसी दिन सीता नवमी का व्रत किया जाएगा। इस दिन मानस, वृद्धि और पद्म नाम के 3 शुभ योग होने से इस पर्व का महत्व और बढ़ जाएगा।
ये भी पढ़ें-
Budhaditya Rajyoga: सूर्य-बुध बनाएंगे राजयोग, 4 राशि वालों पर होगी पैसों की बारिश!
सीता नवमी 2026 शुभ मुहूर्त
25 अप्रैल, शनिवार को सीता नवमी पूजन का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 01 मिनिट से दोपहर 01 बजकर 38 मिनिट तक रहेगा। यानी भक्तों को पूजा के लिए पूरे 02 घण्टे 37 मिनट का समय मिलेगा। मुहूर्त से पहले पूजा की पूर तैयारी कर लें।
सीता नवमी की पूजा विधि (Sita Navami puja vidhi)
- 25 अप्रैल, शनिवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और इसके बाद व्रत-पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त से पहले पूजा की पूर तैयारी कर लें।
- शुभ मुहूर्त शुरू होने पर भगवान श्रीराम के साथ देवी सीता का चित्र साफ स्थान पर स्थापित करें। सबसे पहले चित्र पर कुमकुम से तिलक लगाएं।
- चित्र पर फूलों की माला पहनाएं और शुद्ध घी का दीपक लगाएं। अबीर, गुलाल, चावल, फूल, रोली, फल आदि चीजें भगवान को एक-एक करके चढ़ाएं।
- भगवान श्रीराम को सफेद और देवी सीता को लाल वस्त्र अर्पित करें। बिंदी, काजल, चूड़ी, मेहंदी आदि चीजें भी देवी सीता को अर्पित करें।
- पूजा के बाद फल व अन्य चीजों का भोग भगवान को लगाएं और आरती करें। संभव हो तो कुछ देर देवी सीता के मंत्रों का जाप भी करें।
- सीता नवमी पर इस तरह पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है। इस दिन गरीबों को दान देने का भी विशेष महत्व है।
देवी सीता की आरती (Devi Sita Ki Arti)
जगत जननी जग की विस्तारिणी,
नित्य सत्य साकेत विहारिणी,
परम दयामयी दिनोधारिणी,
सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥
आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥
सती श्रोमणि पति हित कारिणी,
पति सेवा वित्त वन वन चारिणी,
पति हित पति वियोग स्वीकारिणी,
त्याग धर्म मूर्ति धरी की ॥
आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥
विमल कीर्ति सब लोकन छाई,
नाम लेत पवन मति आई,
सुमीरात काटत कष्ट दुख दाई,
शरणागत जन भय हरी की ॥
आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥
Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो ज्योतिषियों द्वारा बताई गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
