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घटोत्कच के मरने पर क्यों खुश हुए थे श्रीकृष्ण, क्यों कहा ‘यदि ये आज न मरता तो मैं स्वयं करता इसका वध?’

घटोत्कच महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक है। घटोत्कच के जन्म और मृत्यु दोनों के ही प्रसंग काफी रोचक और रहस्यमयी हैं। कर्ण के हाथों घटोत्कच की मृत्यु होने पर श्रीकृष्ण काफी खुश हुए थे। बाद में उन्होंने भीम को इसका कारण भी बताया था। 

4 Min read
Author : Manish Meharele
Published : Feb 08 2023, 06:00 AM IST
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जानें घटोत्कच के बारे में रोचक बातें...
Image Credit : google

जानें घटोत्कच के बारे में रोचक बातें...

महाभारत युद्ध में कई योद्धाओं ने पांडवों के पक्ष से युद्ध किया था। घटोत्कच भी इनमें से एक था। घटोत्कच भीम और हिडिंबा का पुत्र था। वो बड़ा ही मायावी था, युद्ध के दौरान उसने कौरव सेना को बहुत क्षति पहुंचाई थी। घटोत्कच के पराक्रम को देखकर दुर्योधन भी घबरा गया था। जब घटोत्कच कर्ण के हाथों मारा गया तो श्रीकृष्ण ये देखकर खुश हुए थे। बाद में श्रीकृष्ण ने इस प्रसन्नता का कारण भी बताया था। आज हम आपको घटोत्कच से जुड़ी कुछ रोचक बातें बता रहे हैं, जो इस प्रकार है…
 

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ऐसे हुआ था घटोत्कच का जन्म
Image Credit : Asianet News

ऐसे हुआ था घटोत्कच का जन्म

महाभारत के अनुसार, भीम का विवाह राक्षस कुल की कन्या हिडिंबा से हुआ था। घटोत्कच इन्हीं का पुत्र था। जन्म के समय सिर पर बाल न होने के कारण भीम ने अपने पुत्र का नाम घटोत्कच रखा था। इसके बाद भीम अपने भाइयों के पास आ गए और घटोत्कच अपनी माता हिडिंबा के पास रहने लगा। माता से ही घटोत्कच ने मायावी विद्याएं प्राप्त की।

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घटोत्कच ने की थी पांडवों की सहायता
Image Credit : Asianet News

घटोत्कच ने की थी पांडवों की सहायता

भीम और घटोत्कच की मुलाकात जंगल में ही हुई थी। जब घटोत्कच बलि के मानव की तलाश कर रहे थे। बाद में जब घटोत्कच को भीम के बारे में पता चला तो उसने क्षमा मांगी और अपने योग्य काम के बारे में पूछा। तब भीम ने कहा था ‘‘समय आने पर मैं तुम्हें याद करूंगा, उस समय तुम मेरी सहायता के लिए आ जाना।”  वनवास के दौरान जब पांडवों को गंदमादन पर्वत पर जाना था तो उस समय घटोत्कच ने ही अपने कंधों पर बैठकर आकाश मार्ग से उन सभी को निश्चित स्थान पर पहुंचाया था।
 

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टैक्स लेने लंका भी गया था घटोत्कच
Image Credit : Asianet News

टैक्स लेने लंका भी गया था घटोत्कच

महाभारत के अनुसार, जब युधिष्ठिर ने इंद्रप्रस्थ राज्य बसाया तो राजसूय यक्ष का आयोजन किया। यज्ञ के नियम के अनुसार, युधिष्ठिर ने भीम, अर्जुन, नकुल व सहदेव को अलग-अलग दिशाओं में राजाओं से कर (टैक्स) लेने के लिए भेजा। जब सहदेव दक्षिण दिशा की ओर चलते-चलते समुद्र तट पर पहुंच गए तो आगे जाने के लिए कोई भी मार्ग न देखकर उन्होंने घटोत्कच को याद किया। घटोत्कच समुद्र पारकर लंका पहुंच गया और उसने राजा विभीषण को अपना परिचय दिया और आने का कारण भी बताया। घटोत्कच की बात सुनकर विभीषण प्रसन्न हुए और उन्होंने कर के रूप में बहुत धन देकर उसे लंका से विदा किया।

 

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घटोत्कच ने भी किया था दुर्योधन से युद्ध
Image Credit : Asianet News

घटोत्कच ने भी किया था दुर्योधन से युद्ध

जब कुरुक्षेत्र के मैदान में कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध होना तय हो गया, उस समय घटोत्कच ने पांडवों की ओर से युद्ध किया। घटोत्कच ने अपनी मायावी विद्या और पराक्रम से कौरवों की सेना में खलबली मचा दी। कौरवों की सेना में अलम्बुष नाम का एक राक्षस था, वह भी मायावी विद्याएं जानता था। घटोत्कच और अलम्बुष के बीच भयंकर युद्ध हुआ। अंत में घटोत्कच ने उसका वध कर दिया। दुर्योधन और घटोत्कच के बीच भी भयंकर युद्ध हुआ। घटोत्कच की वीरता देखकर दुर्योधन भी घबरा गया था।
 

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ऐसे हुआ घटोत्कच का वध
Image Credit : Asianet News

ऐसे हुआ घटोत्कच का वध

जब दुर्योधन को घटोत्कच को हराने का कोई मार्ग नहीं सूझा तो उसने कर्ण से उसका वध करने को कहा। कर्ण ने इंद्र की दी हुई शक्ति से घटोत्कच का वध कर दिया। ये देखकर पांडव सेना में शोक छा गया, लेकिन श्रीकृष्ण प्रसन्न हो गए। जब अर्जुन ने इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि “ जब तक कर्ण के पास इंद्र की शक्ति थी, उसे पराजित नहीं किया जा सकता था। अब अर्जुन को कर्ण से कोई खतरा नहीं है।” श्रीकृष्ण ने ये भी कहा कि “यदि आज घटोत्चक नहीं मरता तो एक दिन मैं ही उसका वध कर देता क्योंकि वह ब्राह्मणों व यज्ञों से शत्रुता रखने वाला राक्षस था।” 

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Disclaimer : इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें। आर्टिकल पर भरोसा करके अगर आप कुछ उपाय या अन्य कोई कार्य करना चाहते हैं तो इसके लिए आप स्वतः जिम्मेदार होंगे। हम इसके लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।


 



 
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About the Author

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Manish Meharele
मनीष मेहरेले। मीडिया जगत में इनके पास 19 साल से ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर धर्म-आध्यात्म बीट पर काम कर रहे हैं। करियर की शुरुआत इन्होंने स्थानीय अखबार दैनिक अवंतिका से की थी। इसके बाद वह दैनिक भास्कर प्रिंट उज्जैन में वाणिज्य डेस्क प्रभारी रहे और 2010-2019 तक दैनिक भास्कर डिजिटल में धर्म डेस्क पर काम किया। इन्हें महाभारत, रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों का अच्छा ज्ञान है। इनके पास जीव विज्ञान में बीएससी स्नातक की डिग्री है।

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