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Diwali 2025: क्यों मनाते हैं दिवाली? जानें 5 कारण, तीसरी वजह सबसे रहस्यमयी

Diwali 2025: हर साल कार्तिक मास की अमावस्या पर दीपावली मनाई जाती है। ये हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार है। दिवाली क्यों मनाते हैं, इसके पीछे कईं कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं जो इसे और भी खास बनती हैं।

3 Min read
Author : Manish Meharele
| Updated : Oct 17 2025, 03:41 PM IST
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जानें दिवाली से जुड़ी रोचक मान्यताएं
Image Credit : freepik

जानें दिवाली से जुड़ी रोचक मान्यताएं

Kyo Manate Hai Diwali: हर साल कार्तिक मास की अमावस्या पर दिवाली पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 20 अक्टूबर, सोमवार को मनाया जाएगा। दिवाली पर मुख्य रूप से देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस पर्व में दीपक जलाकर पूरे घर को सजाया जाता है। घरों का रंग-रोशन किया जाता है। तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं? इस पर्व से जुड़ी अनेक प्रचलित कथाएं हैं। इनमें से कुछ के बारे में आमजन नहीं जानते। आगे जानें दिवाली बनाने से जुड़ी कथाएं…

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श्रीराम के आने की खुशी में जलाए थे दीपक
Image Credit : Gemini AI

श्रीराम के आने की खुशी में जलाए थे दीपक

अयोध्या मान्यता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने जब राक्षसों के राजा रावण का वध किया तो जब अयोध्या लौट रहे थे, उस दिन कार्तिक अमावस्या थी। अयोध्यावासियों ने सोचा कि अमावस्या की रात में कहीं श्रीराम कहीं रास्ता न भटक जाएं। इसलिए उन्होंने पूरे नगर को दीपकों से सजा दिया, ताकि श्रीराम समझ जाएं कि यहीं अयोध्या नगरी है। तभी से दीपावली का पर्व मनाया जा रहा है।

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देवताओं ने की थी देवी लक्ष्मी की पूजा
Image Credit : Gemini AI

देवताओं ने की थी देवी लक्ष्मी की पूजा

दिवाली मनाने के पीछे दूसरी कथा जो सबसे ज्यादा प्रचलित है, वो ये है कि जब देवताओं और राक्षसों ने मिलकर समुद्र मंथन किया तो उसमें से अनेक रत्न निकले। देवी लक्ष्मी भी समुद्र मंथन से प्रकट हुई, तब सभी देवताओं ने उनकी विधि-विधान से पूजा की। तभी कार्तिक अमावस्या पर लक्ष्मी पूजा की परंपरा शुरू हुई।

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यमराज ने बताया था जीवन-मृत्यु का रहस्य
Image Credit : Gemini AI

यमराज ने बताया था जीवन-मृत्यु का रहस्य

कंठोपनिषद की कथा के अनुसार नचिकेता नाम का एक ब्राह्मण बालक जीवन-मृत्यु के रहस्य को जानने यमलोक तक पहुंच गया। वहां पहले तो यमराज ने उसे इस रहस्य को बताने से इंकार कर दिया और नचिकेता के ज्ञान से प्रभावित होकर मृत्यु के गूढ़ रहस्य को समझाया। जीवनृ-मृत्यु के इस रहस्य को जिस दिन यमराज ने बताया था, उस दिन कार्तिक अमावस्या थी, तभी ये दिवाली उत्सव मनाया जा रहा है।

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नरकासुर की मृत्यु का उत्सव है दिवाली
Image Credit : Gemini AI

नरकासुर की मृत्यु का उत्सव है दिवाली

द्वापरयुग में नरकासुर नाम का एक राक्षस था। उसने 16 हजार महिलाओं का अपहरण कर कैद कर लिया था। तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ मिलकर नरकासुर का वध किया और उन महिलाओं को कैद से आजाद कर दिया। इसके दूसरे दिन सभी लोगों ने दीपक जलाकर उत्सव मनाया। तभी से दिवाली पर्व मनाया जा रहा है।

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इसलिए करते हैं देवी लक्ष्मी की पूजा
Image Credit : Gemini AI

इसलिए करते हैं देवी लक्ष्मी की पूजा

एक समय सनतकुमारों ने ऋषियों से भरी सभा में कहा कि ‘कार्तिक अमावस्या पर सभी को देवी लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए।‘ जब मुनियों ने इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया ‘एक बार दैत्यों के राजा राजा बलि के कारागार में देवी लक्ष्मी समस्त देवी देवताओं के साथ बंधन में थीं। तब कार्तिक अमावस्या पर भगवान विष्णु ने उन्हें बंधन मुक्त करवाया था। इसलिए इस तिथि पर देवी लक्ष्मी की पूजा से सुख-समृद्धि सभी प्राप्त होते हैं।’

Disclaimer 
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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About the Author

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Manish Meharele
मनीष मेहरेले। मीडिया में 19 साल का अनुभव, अभी एशियानेट न्यूज हिंदी के डिजिटल में काम कर रहे हैं। महाभारत, रामायण जैसे धार्मिक ग्रंथों का अच्छा ज्ञान है। ज्योतिष-हस्तरेखा, उपाय, वास्तु, कुंडली जैसे टॉपिक पर पकड़ है। यह जीव विज्ञान में बीएससी स्नातक हैं । करियर की शुरुआत स्थानीय अखबार दैनिक अवंतिका से की। 2010 से 2019 तक दैनिक भास्कर डॉट कॉम में धर्म डेस्क पर काम किया है।
दिवाली

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