Vijaya Ekadashi Vrat Katha in hindi: इस बार विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी, शुक्रवार को किया जाएगा। इस एकादशी का महत्व अनेक धर्म ग्रंथों में बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से सभी कामों में सफलता मिलने के योग बनते हैं।
Vijaya Ekadashi Vrat Katha In Hindi: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी कहते हैं। इस एकादशी का महत्व स्वय भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुनको बताया था। ऐसा कहते हैं कि संसार के कठिन से कठिन काम इस व्रत को करने से सहजता से पूरे हो सकते हैं। इसलिए इसका नाम विजया एकादशी है। इस एकादशी से जुड़ी एक कथा भी है जिसे व्रती (व्रत करने वाले) को जरूर सुनना चाहिए, तभी उसे इस व्रत का पूरा फल मिलता है। आगे जानिए इस व्रत से जुड़ी रोचक कथा…
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विजया एकादशी की कथा हिंदी में
त्रेतायुग में अयोध्या के राजा श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मिला तो वे अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ पंचवटी में आकर निवास करने लगे। उस दौरान देवी सीता को अकेला पाकर राक्षसों के राजा रावण ने देवी सीता का हरण कर लिया। पत्नी में खोज में श्रीराम भटकते-भटकते वानरों के राजा सुग्रीव से मिले और उनसे मित्रता कर ली।
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श्रीराम के भक्त हनुमान ने लंका जाकर देवी सीता का पता लगाया और वापस आकर उन्हे पूरी बात बताई। देवी सीता के बारे में जानकर श्रीराम वानर और भालुओं की सेना लेकर लंका की ओर गए मगर बीच में अथाह समुद्र देखकर उन्होंने लक्ष्मण से कहा ‘इतना विशाल समुद्र हमारी सेना कैसे पार करेगी?’
पास ही में वकदाल्भ्य ऋषि का आश्रम था, श्रीराम उनके पास गए और इस दुविधा के बारे में बताया। तब वकदाल्भ्य ऋषि ने श्रीराम को फाल्गुन मास की विजया एकादशी का व्रत करने को कहा और बोले ‘इस एकादशी का व्रत करने से कठिन से कठिन कार्य भी सहजता से हो जाते हैं।’
वकदाल्भ्य ऋषि के कहे अनुसार श्रीराम सहित पूरी सेना ने विजया एकादशी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से ही श्रीराम सेना सहित लंका पहुंचें और वहां जाकर रावण का वध किया। इस प्रकार जो भी विजया एकादशी का व्रत पूरे विधि-विधान से करते हैं, उनके कठिन कार्य भी सहजता से हो जाते हैं।
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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
