Vinayaki Chaturthi July 2026 Date:हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए व्रत किया जाता है। इस विनायकी चतुर्थी व्रत कहते हैं।

Vinayaki Chaturthi July 2026 Shubh Muhurat: हर शुभ कार्य से पहले भगवान श्रीगणेश की पूजा की जाती है। इसलिए श्रीगणेश को प्रथम पूज्य भी कहते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार चतुर्थी तिथि के स्वामी श्रीगणेश ही हैं। इसलिए हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान श्रीगणेश की कृपा पाने के लिए विशेष व्रत किया जाता है, इसे विनायकी चतुर्थी व्रत कहते हैं। इस बार आषाढ़ मास की विनायकी चतुर्थी का व्रत जुलाई 2026 में किया जाएगा। इस विनायकी चतुर्थी को अनिरुद्ध चतुर्थी भी कहते हैं। जानें इस चतुर्थी की सही डेट, मुहूर्त और पूजा विधि…

ये भी पढ़ें-
कब से शुरू होगा सावन 2026, कब तक रहेगा? नोट करें सावन सोमवार की डेट

जुलाई 2026 में कब करें विनायकी चतुर्थी व्रत?

पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 17 जुलाई, शुक्रवार की सुबह 06 बजकर 27 मिनिट से शुरू होगी जो 18 जुलाई, शनिवार की सुबह 04 बजकर 42 मिनिट तक रहेगी। चूंकि चतुर्थी तिथि का सूर्योदय व चंद्रोदय 17 जुलाई को होंगे, इसलिए इसी दिन ये व्रत किया जाएगा। इस दिन कईं शुभ योग भी बनेंगे जिससे इसका महत्व और भी अधिक हो जाएगा।

ये भी पढ़ें-
Hanuman Puja Rules: कब न करें हनुमानजी की पूजा, क्या न चढ़ाएं? ये गलतियां भूलकर न करें

17 जुलाई 2026 विनायकी चतुर्थी पूजा मुहूर्त

आषाढ़ मास की विनायकी चतुर्थी पर पूजा का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 05 मिनिट से दोपहर 01 बजकर 50 मिनिट तक रहेगा यानी भक्तों को पूजा के लिए पूरे 02 घण्टे 45 मिनट का समय मिलेगा। इसके अलावा अन्य मुहूर्त इस प्रकार हैं-
सुबह 12:33 से दोपहर 02:12 तक
शाम 05:31 से 07:10 तक

विनायकी चतुर्थी पूजा विधि-मंत्र

- व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद हाथ में जल, चावल और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक उपवास रखें।
- शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। सबसे पहले चंदन या कुमकुम का तिलक लगाएं, फिर पुष्प अर्पित करें और घी का दीपक व धूप जलाकर पूजा शुरू करें।
- अब भगवान श्रीगणेश को दूर्वा, चावल, रोली, इत्र, जनेऊ, सुपारी, फूल और अन्य पूजन सामग्री एक-एक करअर्पित करें। पूजा के दौरान श्रद्धा से ऊं गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें।
- पूजा के बाद अपनी इच्छा अनुसार मिठाई या फल का भोग लगाएं। विधिपूर्वक आरती करें। रात में चंद्रमा के दर्शन होने पर उन्हें जल का अर्घ्य दें और फूल, चावल व कुमकुम से पूजन करें।
- इस तरह पूजा के बाद भोजन करें। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करने से गणपति बप्पा की कृपा प्राप्त होती है तथा परिवार में सुख, समृद्धि और मंगल बना रहता है।


Disclaimer
इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।