हर पति-पत्नी यही चाहते हैं कि उनकी संतान स्वस्थ और सुंदर और सौभाग्यशाली हो। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके यहां संतान का जन्म नहीं हो पाता। इसके कई कारण हो सकते हैं।

उज्जैन. ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण द्विवेदी के अनुसार, प्रत्येक मास के दोनों पक्षों की चतुर्थी तिथि को भगवान श्रीगणेश के बाल रूप की पूजा की जाए तो संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी हो सकती है। इस बार 31 अक्टूबर, गुरुवार को विनायकी चतुर्थी है-

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इस विधि से करें चतुर्थी की पूजा
प्रत्येक चतुर्थी पर सुबह स्नान आदि करने के बाद पति-पत्नी एक साथ भगवान श्रीगणेश के बाल स्वरूप की पूजा करें। पूजा करने के बाद नीचे लिखे मंत्र का जाप भी विधि-विधान से करें। इस मंत्र का जाप करने से संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है। संभव हो तो अपने घर के मुख्य द्वार के ऊपर श्रीगणेश के बाल स्वरूप की प्रतिमा या चित्र लगाएं। आते-जाते इस प्रतिमा को नमस्कार करें और संतान प्राप्ति की कामना करें।

मंत्र
ऊँ श्रीं ह्रीं क्लीं गणेश्चराय ब्रह्मरूपाय चारवे।
सर्वसिद्धिप्रदेशाय विघ्नेशाय नमो नम:।।
(ब्रह्मवैवर्तपुराण, गणपतिखण्ड 13/32)

मंत्र जाप करने के विधि
- चतुर्थी तिथि की सुबह स्नान आदि करने के बाद साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद श्रीगणेश की पूजा करें और उन्हें दूर्वा चढ़ाएं साथ ही लड्‌डू का भोग भी लगाएं।
- इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके कुश के आसन पर बैठें और चंदन की माला से ऊपर लिखे मंत्र का जाप करें।
- लड्‌डू का प्रसाद पहले पति-पत्नी खाएं और बाद में इसे अन्य लोगों को बांट दें। इस उपाय का असर आपको कुछ ही समय में दिखने लगेगा।