दिल्ली कैपिटल्स 2025 में 18 साल का खिताबी सूखा खत्म करने उतरेगी। टीम ने अपनी बल्लेबाजी मजबूत की है, लेकिन तेज गेंदबाजी का विदेशी खिलाड़ियों पर बहुत अधिक निर्भर होना एक बड़ी चुनौती है।

नई दिल्लीः सीजन की शुरुआत 6 मैचों में 5 जीत के साथ हुई, लेकिन अंत में टीम प्लेऑफ तक भी नहीं पहुंच पाई। टर्निंग पॉइंट रहा मुंबई इंडियंस के खिलाफ मिली दो हार। पर क्या दिल्ली कैपिटल्स के खिताबी सपनों के टूटने की वजह सिर्फ यही थी? नहीं, असली वजह थी पूरे टूर्नामेंट में एक संतुलित प्लेइंग इलेवन न ढूंढ पाना और खिलाड़ियों के प्रदर्शन में लगातार उतार-चढ़ाव। अब सवाल यह है कि क्या इस बार दिल्ली 18 साल का इंतजार खत्म कर पाएगी? क्या टीम इतनी मजबूत है कि अपनी पुरानी गलतियों को सुधार सके?

2025 में दिल्ली के लिए सबसे बड़ी चुनौती ओपनिंग कॉम्बिनेशन थी। 14 मैचों में पांच अलग-अलग जोड़ियां मैदान पर उतरीं। केएल राहुल, फाफ डु प्लेसिस, अभिषेक पोरेल, करुण नायर और जेक फ्रेजर-मैकगर्क को अलग-अलग मैचों में ओपनिंग के लिए भेजा गया। लेकिन इस बार मैनेजमेंट ने इस समस्या का हल निकालने के लिए कई स्पेशलिस्ट ओपनर्स को टीम में शामिल किया है। इनमें इंग्लैंड के बेन डकेट, श्रीलंका के पाथुम निसांका, पृथ्वी शॉ के अलावा राहुल और अभिषेक पोरेल भी शामिल हैं।

यहां सबसे अहम है सही कॉम्बिनेशन ढूंढना, खासकर केएल राहुल का रोल तय करना। पिछले सीजन में राहुल को मिडिल ऑर्डर और ओपनिंग, दोनों जगह आजमाया गया था। उन्होंने 13 पारियों में 150 की स्ट्राइक रेट से 539 रन बनाए थे। लेकिन इस सीजन के लिए जो टीम है, उसे देखकर लगता है कि राहुल की जरूरत मिडिल ऑर्डर में नहीं है। डगआउट में करुण नायर, डेविड मिलर, अक्षर पटेल, आशुतोष शर्मा, ट्रिस्टन स्टब्स और नीतीश राणा जैसे बल्लेबाजों की लंबी फौज है। इसलिए पूरी उम्मीद है कि राहुल ही दिल्ली के लिए ओपनिंग करेंगे।

राहुल और बेन डकेट की जोड़ी लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन के लिए अच्छी है, लेकिन टी20 वर्ल्ड कप में पाथुम निसांका का फॉर्म भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। निसांका श्रीलंका के टॉप स्कोरर थे, जबकि डकेट इंग्लैंड के लिए बेंच पर ही बैठे रहे। दिल्ली की उम्मीदें इस बार इसी लंबी बैटिंग लाइन-अप पर टिकी हैं। मिडिल ऑर्डर कमजोर नहीं है। 2025 में पूरी तरह निराश करने वाले डेविड मिलर ने वर्ल्ड कप में अपना पुराना रंग वापस पा लिया। इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने 6 पारियों में 58 की औसत और 155 की स्ट्राइक रेट से 174 रन बनाए। स्टब्स का प्रदर्शन भी वर्ल्ड कप में अच्छा रहा।

सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में नीतीश राणा दिल्ली के टॉप स्कोरर थे। उन्होंने 148 की स्ट्राइक रेट से 274 रन बनाए थे। हालांकि, करुण नायर का फॉर्म एक चिंता का विषय है। रणजी के आखिरी दौर में उनका बल्ला खामोश था और सैयद मुश्ताक अली में तो वह पूरी तरह फेल रहे। सिर्फ विजय हजारे ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन कुछ खास रहा। करुण के फॉर्म के आधार पर ही दूसरे भारतीय खिलाड़ियों को प्लेइंग इलेवन में मौका मिल पाएगा।

दिल्ली के स्पिन डिपार्टमेंट में कोई चिंता की बात नहीं है। टीम में कुलदीप यादव, अक्षर पटेल और विप्रज निगम जैसे विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। अक्षर कप्तान हैं, इसलिए टीम में उनकी जगह पक्की है। विप्रज को ऑलराउंडर होने का फायदा मिलता है, लेकिन मौजूदा फॉर्म कुलदीप यादव के साथ है।

अब बात करते हैं पेस अटैक की। दिल्ली की तेज गेंदबाजी की असली ताकत विदेशी खिलाड़ी हैं- मिचेल स्टार्क, लुंगी एनगिडी, काइल जैमीसन और दुष्मंथा चमीरा। भारतीय तेज गेंदबाजों में टी. नटराजन और मुकेश कुमार हैं। अगर नटराजन और मुकेश टूर्नामेंट में अपनी लय नहीं पकड़ पाए, तो दिल्ली को अपनी पूरी प्लेइंग इलेवन में फेरबदल करना पड़ सकता है। विदेशी तेज गेंदबाजों को शामिल करने के लिए बैटिंग लाइन-अप में कटौती करनी होगी, जिससे बल्लेबाजी काफी हद तक भारतीय खिलाड़ियों पर निर्भर हो जाएगी।

2025 का सीजन बताता है कि लगातार हार के बाद वापसी करना दिल्ली के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। इसके अलावा, अक्षर पटेल का बतौर कप्तान कम अनुभवी होना भी एक फैक्टर था। इस बार एक बेहतर टीम के साथ उतर रही दिल्ली 18 साल का इंतजार खत्म कर पाएगी या नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा।